लखनऊ। लॉकडाउन के बाद से फार्मा कंपनियों के उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, मगर कुछ फैक्ट्रियों में उत्पादन बंद है तो कहीं 50 से 75 फीसद कम उत्पादन हो रहा है। बाजार में दवाओं व अन्य उत्पादों की कमी के पीछे ऐसे तमाम कारण होने की संभावना अभी तक सामने आ रही थी। मगर हकीकत कुछ और भी है, जिससे दवाओं को लेकर बाजार में उथल पुथल के हालात बनना शुरू हो गए हैं। ट्रांसपोर्ट नगर स्थित फार्मा कंपनियों के डिपो (सीएनएस) से दवाएं अमीनाबाद स्थित थोक बाजार तक आती हैं। यहां से शहर के करीब चार हजार रिटेलर दवाएं उठाते हैं। जिसके जरिए शहर के लोगों को जरूरी दवाएं मुहैया हो पाती हैं। मगर बीते दिनों अमीनाबाद मार्केट में कोरोना संक्रमण से जुड़े सामने आए मामले के कारण दवा के थोक बजार को जिला प्रशासन द्वारा ट्रांसपोर्ट नगर शिफ्ट करने के आदेश जारी किए गए। दवा विक्रेता एसोसिएशन के एक पदाधिकारी के मुताबिक थोक बाजार को ट्रांसपोर्ट नगर में शिफ्ट किया जाना आसान न था। इसके चलते तमाम विक्रेता ट्रांसपोर्ट नगर शिफ्ट नहीं हो सके। नतीजतन, दवाओं की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो गई। आलम यह है कि मेडिकल स्टोर्स पर जीवनरक्षक दवाओं का भी टोटा बन गया है।
सूत्रों के मुताबिक, अमीनाबाद स्थित दवाओं के थोक विक्रेता के अतिरिक्त कुछ ऐसे भी थोक दवा विक्रेता हैं जो घर से ही कारोबार चला रहे हैं। जिनके पास सीएनएफ और रिटेल की भी दुकान हैं। होता यह है कि थोक विक्रेताओं द्वारा फुट विक्रेताओं को डिस्काउंट पर दवाएं दी जाती हैं। मगर इन दिनों से थोक विक्रेता द्वारा छह से आठ प्रतिशत माल (दवाएं) महंगे दाम पर दे रहे हैं। इसके लिए इनके द्वारा रिटेलर पार्टी से एडवांस पैसा भी जमा करवाया जा रहा है। महानगर क्षेत्र स्थित एक थोक विक्रेता द्वारा इन दिनों ऐसे ही हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। जानकीपुरम स्थित मेडिकल स्टोर संचालक के अनुसार जीवन रक्षक दवाओं की जबरदस्त कमी बन आई है। जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कॉर्डियक की दवाओं का स्टॉक खत्म हो गया है। इसके अलावा इंसुलिन का स्टाक भी खत्म हो गया है। इसके लिए निर्धारित तापमान की जरूरत है, मगर सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण इसकी उपलब्धता भी नहीं हो पा रही।










