सरकार फार्मासिस्टों के फर्जी दस्तावेजों की जांच का बढ़ायेगी दायरा

राजस्थान फार्मेसी काउंसिल (आरएमसी) द्वारा फर्जी दस्तावेजों पर जारी किए गए रजिस्ट्रेशनों की स्वास्थ्य विभाग आगे जांच करेगा। बीते साल 2022 में परिषद द्वारा अभूतपूर्व संख्या में फार्मासिस्टों को पंजीकरण दिया गया।

स्वास्थ्य विभाग का खाद्य सुरक्षा और औषधि नियंत्रण आयुक्तालय (एफएसडीसीसी) आरएमसी पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का विवरण एकत्र कर रहा है जिसमें दावा किया गया है कि उन्होंने उन यूनिवर्सिटी में अध्ययन किया है, जिनके दस्तावेज जांच में फर्जी पाए गए थे।

जांच में सामने आया है कि काउंसिल ने 101 फार्मासिस्टों को विभिन्न यूनिवर्सिटीज के फर्जी दस्तावेजों पर पंजीकरण जारी किया था। जिन 101 फार्मासिस्टों के दस्तावेज फर्जी पाए गए, उन्हें बिहार, यूपी और एमपी की चार यूनिवसिर्टी के फर्जी दस्तावेज मिले। यूनिवर्सिटी ने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने यहां पढ़ाई की है। ऐसे और भी कई लोग हो सकते हैं, जिन्होंने यह दिखाते हुए फर्जी दस्तावेज़ जमा किए हों कि उन्होंने चार यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की है। लेकिन, असल में उन्होंने वहां पढ़ाई नहीं की है। एफएसडीसीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हम ऐसे दस्तावेजों की जांच करेंगे।

शिकायतों की जांच करते हुए, एफएसडीसीसी ने पाया कि कुछ यूनिवर्सिटी ने संकेतित नामांकन संख्याओं पर उम्मीदवारों को पंजीकृत करने से इनकार कर दिया है। एफएसडीसीसी को उम्मीद है कि यदि वे और अधिक जांच करेंगे तो उन्हें आरपीसी पंजीकरण कराने वाले ऐसे और भी उम्मीदवार मिलेंगे।

एफएसडीसीसी ने पीआरसी को इन उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच करने और फार्मेसी अधिनियम 1948 के अनुसार उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। एफएसडीसीसी ने आरपीसी को इन उम्मीदवारों के सभी दस्तावेजों की प्रतियां प्रदान करने का निर्देश दिया है, जिसके आधार पर उन्हें फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकृत किया गया है।

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खाद्य सुरक्षा और औषधि नियंत्रण आयुक्तालय (एफएसडीसीसी) द्वारा की गई जांच में, यह पता चला कि राजस्थान में 101 फार्मासिस्टों ने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके राजस्थान फार्मेसी काउंसिल (आरपीसी) से पंजीकरण प्राप्त किया था। इससे मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि पंजीकृत फार्मासिस्टों को केमिस्ट और सरकारी अस्पतालों में काम करने की अनुमति है।
जांच से पता चला कि पिछले सालों की तुलना में 2022 में पंजीकरण की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। फर्जी रजिस्ट्रेशन की शिकायतों के चलते फार्मासिस्टों की भर्ती रोक दी गई थी। एफएसडीसीसी ने वाईबीएन विश्वविद्यालय और आईईसी यूनिवर्सिटी जैसे यूनिवर्सिटी की पहचान की है, जहां उम्मीदवारों ने फर्जी डिप्लोमा और डिग्री प्रमाणपत्र जमा किए हैं। आरपीसी को दस्तावेजों का सत्यापन करने और फार्मेसी अधिनियम 1948 के आधार पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।

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