इसके अलावा हमने इस साल अप्रैल से तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर 85 फीसदी हिस्से में सचित्र चेतावनी छापने का नियम लागू किया है। किशोर न्याय कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के लोगों को तंबाकू उत्पाद बेचने पर सात साल जेल और एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया है। इसके अलावा फिल्मों में जागरूकता के वीडियो दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है।’

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने फिल्म और टीवी में तंबाकू उत्पादों को बढ़ावा देने के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि भारत इस दिशा में सबसे पहले प्रयास करने वाले देशों में है। सम्मेलन में मौजूद दुनियाभर के प्रतिनिधि भारत के प्रयासों से खुश दिखे। तंबाकू विरोधी अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहे टाटा कैंसर अस्पताल के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. पंकज चतुर्वेदी कहते हैं, ‘भारत अकेला ऐसा देश है, जिसने चबाने वाले तंबाकू को प्रतिबंधित किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का अहम योगदान है। कई राज्यों की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को न्यायालय ने सही ठहराया। भारत दुनिया का अकेला देश है, जिसने नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद बेचने को गैर जमानती अपराध बनाया है।






