अमरोहा (यूपी)। 70 अस्पताल सील करने के बावजूद एफआईआर केवल 5 पर ही हुई है। स्वास्थ्य विभाग की यह कार्रवाई आशंका पैदा करने वाली है। विभाग ने जनवरी माह से अब तक करीब 70 अस्पताल-लैब सील किए। यह बिना पंजीकरण के संचालित थे। इनमें कोई चिकित्सक नहीं था। झोलाछाप ही सामान्य मरीजों का आपरेशन कर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे थे। हैरत की बात है सील करने के बाद विभाग आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराना ही भूल गया। अभी तक मुश्किल से पांच के खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज कराई है।

प्रभारी सीएमओ डा. योगेंद्र कुमार ने 31 दिसंबर को कार्यभार ग्रहण किया था। कार्यभार ग्रहण करते ही झोलाछापों के खिलाफ अभियान चलाया गया। अवैध अस्पताल, क्लीनिक व लैब सील करने की कार्रवाई की गई। अब तक करीब 70 से अधिक अस्पताल, क्लीनिक व लैब सील किए हैं। यह बिना पंजीकरण के संचालित थे। विभाग ने सील के बाद आरोपितों को नोटिस जारी भी किए थे।

मगर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने से कतरा रहा है। अभी तक महज पांच के खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज कराकर खानापूर्ति की है। इससे झोलाछापों के हौंसले बुलंद हैं। प्रभारी सीएमओ डा. योगेंद्र सिंह ने बताया कि कुछ झोलाछापों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज भी कराई गई है। अन्य के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।
छापेमारी की आड़ में चल रहा खेल

झोलाछापों के खिलाफ छापेमार कार्रवाई की आड़ में स्वास्थ्य विभाग खेल कर रहा है। झोलाछापों के अस्पताल, क्लीनिक सील कर उन्हें नोटिस भी जारी कर दिए। लेकिन दो-तीन दिन में ही सील अस्पताल व क्लीनिक खुल गए। सवाल यह है कि जब उसमें चिकित्सक ही नहीं थे। बिना पंजीकरण के चल रहे थे तो कैसे खोल दिए। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग सवालों के घेरे में हैं।