नैनीताल (उत्तराखंड)। फार्मासिस्ट के लिए बुरी खबर है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 14 वर्षों से संविदा पर कार्यरत फार्मासिस्टों की याचिका कैंसिल कर दी है। ये हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल श्रीनगर में कार्यरत रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोर्ट पहले ही इस मामले में निर्देश जारी कर चुका है। उस पर निर्णय की समय-सीमा अभी समाप्त नहीं हुई है। ऐसे में समान प्रार्थनाओं के साथ दोबारा याचिका दायर करना न्यायसंगत नहीं है।
यह है मामला
याचियों ने वर्ष 2024 में विज्ञापन 19 अक्टूबर 2024 को जारी विज्ञप्ति को चुनौती दी थी। इसमें 73 फार्मासिस्टों के पदों पर भर्ती निकाली गई थी। तब हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि सरकार 6 महीने के भीतर याचियों के नियमितीकरण पर विचार करने के लिए समिति गठित करे। जब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक याचियों की सेवा में कोई व्यवधान नहीं डाला जाएगा। यह तथ्य भी सामने आया कि उत्तराखंड सरकार ने नियमितीकरण नियमावली में संशोधन किया है। नए नियमों के अनुसार 10 साल की निरंतर सेवा पूरी करने वाले संविदा कर्मचारी नियमितीकरण के पात्र होंगे।
अदालत को सूचित किया गया कि विज्ञापन के आधार पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। सफल अभ्यर्थियों का परिणाम 17 जनवरी 2026 को घोषित किया जा चुका है। चूंकि याचियों को पहले ही 6 महीने की सुरक्षा मिली हुई है। विभाग अभी उनके दावों की समीक्षा कर रहा है। इसलिए वर्तमान में नई याचिका दायर करने का कोई ठोस कारण मौजूद नहीं है। अदालत ने याचिका को रेजुडिकाट के आधार पर वर्जित माना। हाईकोर्ट ने इस याचिका को आधारहीन मानकर खारिज कर दिया।










