नई दिल्ली। भारतीय दवा विनिर्माताओं के लिए अब ब्राजील नया ठिकाना होगा। हाल ही में आयोजित भारत-ब्राजील हेल्थकेयर बिजनेस मीटिंग में यह संभावनाएं उभरी हैं। ब्राजील अब भारतीय दवा निर्माताओं के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख केंद्र बन रहा है। ऐसा खासकर विशेष दवाओं, बायोसिमिलर और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए श्रृंखला में सहयोग के क्षेत्र में दिख रहा है।
इस मीटिंग का आयोजन फार्मेक्सिल के समर्थन से ब्राजील की दवा वितरण कंपनी अमोवेरी फार्मा ने किया। वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल से जनवरी की अवधि में भारत से ब्राजील को दवा निर्यात बढक़र 74 करोड़ डॉलर हो गया। पूरे वित्त वर्ष 2025 में निर्यात 77.8 करोड़ डॉलर रहा। इससे भारत की निर्यात रणनीति में ब्राजील के बढ़ते महत्व का पता चलता है। ब्राजील को होने वाले 60 फीसदी से अधिक दवा निर्यात अब फॉर्मूलेशन और बायोलॉजिक्स द्वारा संचालित है। इन क्षेत्रों में करीब 36 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पता चलता है कि भारतीय एमएसएमई के लिए बाजार कहां बेहतर हो रहा है।
फार्मेक्सिल के चेयरमैन नमित जोशी ने कहा कि भारतीय एमएसएमई विनिर्माताओं के लिए ब्राजील एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। छोटी कंपनियों के लिए एनविसा से मंजूरी लेने की राह आसान हो सकती है। जहां तक भारतीय एमएसएमई का सवाल है तो संभावनाएं अक्सर बाधाओं के साथ आती हैं। ब्राजील सख्ती से विनियमित बाजार है। नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक से पता चलता है कि नियामकीय तालमेल बेहतर हो रहा है।










