नई दिल्ली। सरकारी दवा की अवैध बिक्री करने वाले रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। दिल्ली पुलिस को इसमें सफलता मिली है। अस्पतालों के जरिए मुफ्त वितरण के लिए सरकारी दवाओं को निजी बिक्री के लिए बेचा जाता था। तीन आरोपियों नीरज, सुशील और लक्ष्मण मुखिया को हिरासत में लिया है। सरकारी अस्पताल में फार्मेसी स्टोर के प्रभारी की कथित संलिप्तता की जांच जारी है।
यह है मामला
पुलिस को सूचना मिली थी कि सरकारी अस्पतालों के लिए भेजी जाने वाली दवाएं कहीं ओर सप्लाई हो रही हैं। टीम ने तीस हजारी के राजेंद्र बाजार में जाल बिछाया। दोनों वाहनों को रोका गया और तलाशी ली। कार से दवाइयों के दो डिब्बे और टेम्पो से 97 डिब्बे बरामद हुए। सभी डिब्बों पर सरकारी आपूर्ति लिखा हुआ था। जांच में बड़ी मात्रा में दवाएं बरामद हुईं। इनमें सेफिक्साइम (200 मिलीग्राम) की 1,18,800 गोलियां, एमोक्सिसिलिन पोटेशियम क्लैवुलनेट की 19,200 गोलियां और एरिथ्रोपोइटिन, बरामद हुई। वहीं, सेफ्ट्रियाक्सोन, सेफ्टाजड़िाइम, मेरोपेनेम, रेबीज एंटीसेरम और टुरोक्टोकोग अल्फा (नोवोएट 500) के 6,552 इंजेक्शन मिले।
ये दवाएं सरकारी अस्पतालों के माध्यम से मुफ्त वितरण के लिए थीं। कथित तौर पर निजी बाजार में बेची जा रही थीं। आरोपी नीरज कोई वैध दस्तावेज़ पेश नहीं कर सका। न ही दवाओं को अपने पास रखने का कोई स्पष्टीकरण दे सका। बाद में उसने सरकारी अस्पताल के फार्मेसी स्टोर प्रभारी के साथ मिलकर दवाएं खरीदना स्वीकारा। साथ ही उन्हें उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में बेचने ले जाने की बात स्वीकारी। सुशील ने इस काम में उसकी मदद की थी। लक्ष्मण मुखिया का टेम्पो खेप को ले जाने के लिए किया था।










