मैनपुरी (उप्र)। जिला अस्पताल की हीमोग्लोबिन रिपोर्ट गलत पाई गई है। महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल की जांच व्यवस्था पर फिर सवाल उठे हैं। दुर्गपुर निवासी संजीव सिंह यादव ने जिलाधिकारी को शिकायत दी है। आरोप लगाया है कि जिला अस्पताल की लैब ने उनकी पत्नी की गलत रिपोर्ट तैयार की। इससे परिवार मानसिक तनाव में आ गया। अस्पताल प्रशासन ने तकनीकी खराबी और ब्लड क्लॉटिंग की संभावना जताई है। लैब टेक्नीशियन से स्पष्टीकरण मांगा है।

यह है मामला

संजीव सिंह अपनी पत्नी सुमन देवी को उपचार के लिए महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल ले गए थे। डॉक्टर ने खून की जांच लिखी। रिपोर्ट में सुमन देवी का हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 3.6 दर्शाया गया। इस रिपोर्ट से परिवार चिंतित हो गया। उन्होंने तुरंत डॉक्टर जयजयराम से परामर्श किया। उन्होंने मरीज को तत्काल भर्ती करने की सलाह दी। रिपोर्ट पर संदेह होने पर परिजनों ने उसी दिन निजी सिद्धार्थ पैथ लैब में दोबारा जांच कराई। वहां हीमोग्लोबिन 9.2 पाया गया। इसके बाद एक अन्य निजी लैब, मैनपुरी पैथ लैब में कराई गई।

यहां जांच में हीमोग्लोबिन 11.5 निकला। तीन अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर सामने आने के बाद परिवार ने जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संजीव का आरोप है कि जिला अस्पताल की लापरवाही के कारण उन्हें मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी। सरकारी अस्पतालों पर आम जनता का भरोसा होता है। ऐसी लापरवाही मरीजों की जान जोखिम में डाल सकती है। यादव ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

वहीं इस मामले में सीएमएस डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में है। बिजली ट्रिपिंग और ओवरलोडिंग की वजह से मशीन में तकनीकी दिक्कत आई थी। कई बार ब्लड में क्लॉटिंग होने से भी रिपोर्ट प्रभावित हो जाती है। फिर भी पूरे मामले में लैब टेक्नीशियन से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।