– मुख्य सचिव कार्यालय के स्पष्ट आदेशों को भी आरजीएचएस विभाग में किया गया दरकिनार।
– आवेदक ने आरटीआई आवेदन में लिखा था ‘2025’, अधिकारी ने खुद ‘2026’ पढ़कर सूचना देने से किया इनकार।
– दोषियों को बचाने के लिए “ईमेल प्राप्त नहीं होने” का हास्यास्पद तकनीकी बहाना बनाने का आरोप।

जयपुर/ब्यावर। राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (RGHS) में चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने और दोषियों को संरक्षण देने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। आरजीएचएस की सहायक परियोजना निदेशक (APD) एवं राज्य लोक सूचना अधिकारी बिंदु कुमावत पर आरटीआई आवेदन के सरकारी रिकॉर्ड और तथ्यों में जानबूझकर कूटरचना (Falsification of Records) करने के सनसनीखेज आरोप लगे हैं। ब्यावर निवासी आवेदक कैलाश चंद्र शर्मा ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील (First Appeal) दायर कर विभाग के इस खेल का पर्दाफाश किया है।

मुख्य सचिव कार्यालय के आदेशों की भी अवहेलना

दस्तावेजों के अनुसार, आवेदक कैलाश चंद्र शर्मा ने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की मूल शिकायत 05 मई 2025 को मुख्य सचिव (Chief Secretary) कार्यालय में दर्ज कराई थी। मुख्य सचिव कार्यालय के लोक शिकायत सेल द्वारा संदर्भ संख्या 1000414032 के तहत इस फाइल को आरटीआई अधिनियम की धारा 6(3) के तहत आरजीएचएस (RGHS) विभाग को आधिकारिक तौर पर ट्रांसफर किया गया था। लेकिन सहायक परियोजना निदेशक (APD) बिंदु कुमावत ने राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक कार्यालय (मुख्य सचिव कार्यालय) के इन स्पष्ट प्रशासनिक आदेशों की भी सरेआम अवहेलना कर दी।

सहायक परियोजना निदेशक (APD) बिंदु कुमावत पर लगे संगीन आरोप

प्रथम अपील में अधिकारी बिंदु कुमावत की कार्यप्रणाली पर सीधे तौर पर भ्रष्टाचार में संलिप्तता और शासकीय शक्तियों के दुरुपयोग के बड़े आरोप लगाए गए हैं:

1. तथ्यों की जालसाजी (Falsification of Records): आवेदक ने आरटीआई में स्पष्ट रूप से वर्ष 2025 की शिकायत पर कार्रवाई मांगी थी और मूल शिकायत पत्र भी साथ में भौतिक रूप से नत्थी (Attach) किया था। इसके बावजूद सहायक परियोजना निदेशक (APD) बिंदु कुमावत ने जानबूझकर और एक सोची-समझी साजिश के तहत अपने पत्र में वर्ष बदलकर उसे ‘दिनांक 05.05.2026’ का ईमेल बता दिया, ताकि सूचना को खारिज किया जा सके। आवेदक का आरोप है कि यह कृत्य तथ्यों के साथ जालसाजी की श्रेणी में आता है।

2. भ्रष्टाचारियों को अवैध संरक्षण: अपील में साफ आरोप लगाया गया है कि विभाग में हुए गंभीर वित्तीय घोटाले और इसमें संलिप्त लोगों को बचाने के इरादे (Malafide Intention) से ही सहायक परियोजना निदेशक (APD) बिंदु कुमावत ने यह “ईमेल प्राप्त नहीं होने” का हास्यास्पद और तकनीकी बहाना बनाया है।

3. धारा 20 के तहत जुर्माने की पात्रता: एक लोक सेवक (Public Servant) होते हुए जानबूझकर भ्रामक और असत्य बहानेबाजी करने के कारण, उन पर आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) और 20(2) के तहत 250 रुपये प्रतिदिन (अधिकतम 25,000 रुपये) का व्यक्तिगत जुर्माना लगाने और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है।

अपील में की गई मुख्य प्रार्थनाएं (Relief Sought)

पीड़ित आवेदक ने प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष गुहार लगाई है कि:

– सहायक परियोजना निदेशक (APD) बिंदु कुमावत द्वारा जारी किए गए मनमाने और कानून-विरोधी आदेश (दिनांक 18-08-2026) को तुरंत निरस्त (Quash) किया जाए।
– मुख्य सचिव कार्यालय से प्राप्त संदर्भ संख्या के आधार पर विभाग द्वारा की गई जांच रिपोर्ट, नोटशीट, आदेशों और भुगतान की स्थिति की प्रमाणित प्रतियां (बिंदु 1 से 11 तक) आवेदक को अविलंब एवं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएं।
– जानबूझकर भ्रामक जानकारी देने और मुख्य सचिव कार्यालय के निर्देशों की अवहेलना करने के लिए अधिकारी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।

आरजीएचएस (RGHS) महकमे में सूचना को छुपाने और उसे दबाने के लिए आरटीआई के रिकॉर्ड्स में हुई इस कथित हेरफेरी ने अब तूल पकड़ लिया है। अब पूरा मामला प्रथम अपीलीय अधिकारी के पाले में है, जहाँ देखना होगा कि विभाग अपनी अधिकारी का बचाव करता है या आवेदक को न्याय देते हुए दस्तावेज सार्वजनिक करता है।