मुंबई। सन फार्मा को काफी कामयाबी मिली है। कंपनी ने लेरोडाल्सिबेप की ग्लोबल लाइसेंसिंग डील की है। सन फार्मा और अमेरिका की एलआईबी थेराप्यूटिक्स के बीच यह समझौता हुआ है। समझौते के तहत सन फार्मा के पास अमेरिका और चीन को छोडक़र पूरी दुनिया में इस दवा को बनाने-बेचने के अधिकार होंगे। इसका असर आज सन फार्मा के शेयरों पर देखने को मिल सकता है।

क्यों यह डील इतनी अहम?

Lerodalcibep एक नई PCSK9 इनहिबिटर दवा है। इसका इस्तेमाल कोलेस्ट्रॉल (LDL-C) को कम करने के लिए किया जाता है। इसे यूरोपियन यूनियन में लाइरोकाउल (Lyrokaul) के नाम से मंजूरी मिली है। इस डील के कई रणनीतिक पहलू हैं।

1- बड़ा मार्केट साइज: अमेरिका और चीन को छोडक़र PCSK9 इनहिबिटर मार्केट का साइज $3.7 बिलियन से अधिक है। यह 38 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। केवल यूरोप में ही इसका मार्केट $2.9 बिलियन का है।

2- सुविधाजनक खुराक : यह दवा महीने में केवल एक बार 300mg/1.2mL इंजेक्शन के रूप में ली जाती है। इसे सामान्य तापमान पर 6 महीने तक स्टोर किया जा सकता है।

3- इनोवेटिव पोर्टफोलियो में विस्तार : सन फार्मा के ग्लोबल इनोवेटिव मेडिसिन सेगमेंट का योगदान कंपनी की कुल बिक्री में लगभग 22 फीसदी है। यह समझौता हृदय रोग सेगमेंट में कंपनी की स्थिति को और मजबूत करेगा। सन फार्मा LIB थेराप्यूटिक्स को अपफ्रंट पेमेंट और बिक्री आधारित रॉयल्टी देगी।