…ताकि बच सके मां की जान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, करवाएं गर्भपात

नई दिल्ली: जब बात मानवता और जिंदगी बचाने की हो तो कायदे-कानून दूसरे पायदान पर रख कर फैसले लेने पड़ते हैं। यही वजह रही कि आज सर्वोच्च न्यायालय ने बलात्कार पीडि़ता मुंबई निवासी 24 सप्ताह की गर्भवती को गर्भपात की इजाजत दे दी। न्यायालय ने स्पष्ट किया, यदि मां की जान को खतरा है, तो 20 हफ्ते बाद भी गर्भपात कराया जा सकता है। कानूनन: मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट 1971 में20 हफ्ते से ज्यादा गर्भवती महिला का गर्भपात नहीं हो सकता। 1971 में संसद नेयह कानून इलीगल अबॉर्शन और मैटरनल मॉर्टिलिटी को कम करने के उद्देश्य से पास किया था।
इससे पहले भारत में अबॉर्शन लॉ ब्रिटेनकानून के मुताबिक था जिसमें महिला को जान का खतरा नहीं है तो गर्भपात कराना गंभीर अपराध माना गया। इसके तहत महिला को 7 साल कारावास और जुर्माना तथा गर्भपात करवाने में शामिल चिकित्सक को 3 साल सजा का प्रावधान था।
न्यायालय में दायर अपील में मुंबई निवासी पीडि़ता ने कहा कि उसके मंगेतर ने शादी का झांसा देकर बलात्कार किया और दूसरी शादी कर ली। गर्भावस्था में चिकित्सीय जांच कराई तो पता चला कि बच्चे में विकृतियां हैं, जिससे उसकी जान जा सकती है। डॉक्टरों के परामर्श और जांच रिपोर्ट के आधार पर पीडि़ता ने एमटीपी एक्ट को न्यायालय में चुनौती दी। तीन दिन पहले कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पीडि़ता की जांच के लिए मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के सात डॉक्टरों का बोर्ड बनाया और रिपोर्ट देने को कहा। बोर्ड की रिपोर्ट में सामने आया कि गर्भपात नहीं हुआ तो तो मां की जान को खतरा हो सकता है।
जस्टिस जेएस केहर और अर्जुन मिश्रा की पीठ ने बोर्ड की सिफारिश को मंजूरी देते हुए गर्भपात की इजाजत दी। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के मुताबिक, केंद्र एमटीपी एक्ट के सेक्शन 5 के तहत गर्भपात की इजाजत दे सकता है, यदि मां की जान को खतरा है। इस 26 वर्षीय बलात्कार पीडि़ता ने मेडिकल अबॉर्शन लॉ-1971 की धारा 3(2) (बी) को खत्म करने की मांग की थी।
जानकारी के मुताबिक, भारत को शामिल कर विश्व में आठ देश-अमेरिका, चीन, उत्तर कोरिया, वियतनाम, सिंगापुर, कनाडा तथा नीदरलैंड्स ही ऐसे हैं, जहां जरूरी वजहों से 20 हफ्ते की प्रेग्नेंसी के बाद गर्भपात को कानून का उल्लंघन नहीं माना जाता। जबकि लैटिन अमेरिका के चार (चिली, डोमिनिकन रिपब्लिक, अल सल्वाडोर तथा निकारागुआ) और यूरोप के दो देश- वेटिकन सिटी और माल्टा ऐसे हैं जहां किसी भी सूरत में गर्भपात को मंजूरी नहीं है।
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