छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश)। संक्रमण की दवा माउथवॉश में कीड़ा मिलने का मामला प्रकाश में आया है। इसके चलते बवाल बच गया है। कोल्ड सिरप से 25 बच्चों की मौत के बाद भी सरकारी अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर लापरवाही थम नहीं रही। जेपी जिला अस्पताल में इन मामलों ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इससे पहले फफूंद लगी दवा की शिकायत मिली थी। अभी इसकी जांच पूरी भी नहीं हुई और मरीज को कीड़े जैसी आकृति वाला माउथ वॉश दे दिया गया। महज तीन दिन में दो शिकायतों ने यह संकेत दे दिए है कि व्यवस्था में सुधार के दावे जमीनी हकीकत में नहीं उतर पाए हैं।

तीन जनवरी को मरीज सतीष सेन ने आरोप लगाया कि अस्पताल से दी गई दवा में फफूंदी जमी हुई थी। इसकी शिकायत अस्पताल प्रशासन से की। दवा की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। 6 जनवरी को मनीष नामक युवक को गले के संक्रमण के इलाज के लिए माउथ वॉश दिया गया। इसमें कीड़े जैसी आकृति दिखाई देने की शिकायत दर्ज कराई है।
दवाओं पर संदेह

दवाओं को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इनमें दर्द निवारक डिक्लोफेनाक 50 एमजी टैबलेट और 50 एमएल का क्लोरहेक्सिडिन माउथ वॉश आईपी 0.2 प्रतिशत शामिल है। माउथ वॉश का सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है। उसमें दिख रही संदिग्ध वस्तु की पुष्टि की जाएगी।

सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने दोनों शिकायतों को गंभीर माना है। पांच सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है। टीम को अस्पताल की फार्मेसी, ड्रग स्टोर के पूरे स्टॉक की गुणवत्ता जांचने के निर्देश दिए हैं।