नई दिल्ली। एंटीबायोटिक दवाएं अस्पतालों में बेअसर हो रहीं हंंै। इसके चलते महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की नई रिपोर्ट ने यह गंभीर चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया के मामलों में 91 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे कई दवाएं अब प्रभावी नहीं रह गई हैं।
आइसीएमआर की यह रिपोर्ट अस्पतालों से प्राप्त कल्चर-पॉजिटिव नमूनों के विश्लेषण पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वाधिक संक्रमणों के लिए ग्राम निगेटिव बैक्टीरिया जिम्मेदार होते हैं। ये बैक्टीरिया तेजी से दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर रहे हैं। इससे उपचार और चुनौतीपूर्ण हो गया है। ये बैक्टीरिया रक्त, पेशाब, सीएसएफ और श्वसन तंत्र के संक्रमण का प्रमुख कारण है।
आइसीयू में विशेष रूप से चिंताजनक स्थिति सामने आई है। यहां एसिनेटोबैक्टर बाउमानी में 91 प्रतिशत तक एंटीबायोटिक प्रतिरोध दर्ज किया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इस बैक्टीरिया को गंभीर प्राथमिक पैथोजन की सूची में रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये जीन नई, अत्यधिक प्रतिरोधी सुपरबग प्रजातियों को जन्म दे सकते हैं। आइसीएमआर ने इस संकट से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई है। संक्रमण नियंत्रण के उपायों और एंटीबायोटिक के तार्किक इस्तेमाल पर जोर दिया है।










