नई दिल्ली। अस्पतालों में इलाज के खर्च को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स में सेवाओं और सुविधाओं की दरें प्रमुखता से प्रदर्शित करवाएं। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने 12 अक्टूबर को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस संबंध में पत्र लिखा है।
मंत्रालय के अनुसार ये दरें अंग्रेजी और स्थानीय भाषा दोनों में लगाई जानी चाहिए, ताकि मरीज और उनके परिजन आसानी से समझ सकें। मंत्रालय का कहना है कि इलाज के खर्च की पहले से जानकारी होने पर मरीज सोच-समझकर फैसला ले सकेंगे, अपनी आर्थिक योजना बना सकेंगे और बिलिंग को लेकर विवाद कम होंगे।
पत्र में राज्यों से मौजूदा नियमों के पालन की समीक्षा करने को भी कहा गया है। स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों की है। जहां केंद्रीय कानून लागू नहीं है, वहां राज्य अपने नियमों के तहत यह व्यवस्था करेंगे। मेडिकल या आयुष वीजा पर भारत आने वाले विदेशी मरीजों के लिए पैकेज दरें भी स्पष्ट रूप से दिखाने को कहा गया है।
हालांकि एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (AHPI) का कहना है कि ज्यादातर अस्पताल दरें प्रदर्शित करते हैं, लेकिन केंद्र द्वारा तय दर सीमा का प्रावधान लागू करना मुश्किल है, क्योंकि इसके लिए जरूरी लागत आकलन अब तक पूरा नहीं हुआ है। यह कदम ऐसे समय आया है जब निजी अस्पतालों में दवाओं और कंज्यूमेबल्स पर भारी मार्जिन को लेकर बहस तेज है।
