नई दिल्ली। कोविड वैक्सीन पर जल्द ही अमेरिका की एफडीए ब्लैक बॉक्स वॉर्निंग लगाने वाली है। इस चेतावनी को दवाइयों पर सबसे ऊपर मोटे अक्षरों में लगाया जाता है। इसका साफ मतलब होता है कि दवा में गंभीर खतरा या जानलेवा रिस्क मौजूद है। इसे इस्तेमाल से पहले बेहद गंभीरता से समझना चाहिए। बता दें कि ट्रंप प्रशासन दोबारा वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहा है। बाहर के कई एक्सपर्ट इस फैसले से हैरान हैं। उनके अनुसार कोविड वैक्सीन को लेकर ऐसी चेतावनी की वैज्ञानिक जरूरत नहीं दिखती।

ब्लैक बॉक्स वॉर्निंग तभी लगाई जाती है, जब किसी दवा से मौत होने का खतरा हो। जैसे ओपिओइड दवाओं पर लत, ओवरडोज और मौत की चेतावनी दी जाती है। गर्भवती महिलाओं के लिए कुछ दवाओं पर जन्म दोष की आशंका लिखी जाती है। डॉ. विनय प्रसाद वैक्सीन की पॉलिसी और सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हालांकि, यह योजना अभी अंतिम चरण में नहीं है और बदल भी सकती है।

वहीं, मॉडर्ना और फाइजर कंपनियों का कहना है कि उनकी वैक्सीन की सुरक्षा करोड़ों डोज़ के डेटा से साबित हो चुकी है। बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं में कोई नया गंभीर खतरा सामने नहीं आया है। आंकड़े भी कहते हैं कि कोविड वैक्सीन ने पहले साल में हीं करीब 2 करोड़ लोगों की जान बचाई।

इस कारण शुरू हुई चर्चा

यूएस एफडीए में कुछ अधिकारी मानते हैं कि वैक्सीन लेबल पर इस रिस्क को और खुलकर लिखना चाहिए। यही कारण है कि ब्लैक बॉक्स वॉर्निंग की चर्चा शुरू हुई है। अभी स्थिति यह है कि एफडीए इस मुद्दे पर आंतरिक समीक्षा कर रहा है।