मुंबई। स्तन कैंसर की पहली प्रोटैक दवा को एफडीए ने मंजूरी दे दी है। अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने वेपडेजेस्ट्रेंट (ब्रांड नाम वेप्पानू) को मंजूरी दी है। इससे स्तन कैंसर के उपचार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। यह दवा ईआर-पॉजिटिव, एचईआर2-नेगेटिव और ईएसआर1-म्यूटेशन युक्त उन्नत या मेटास्टेटिक स्तन कैंसर मरीजों के लएि है। इस दवा का विकास आर्विनास ऑपरेशंस इंक. और फाइजर इंक. ने संयुक्त रूप से किया है। खास बात यह है कि यह दुनिया की पहली एफडीए-स्वीकृत प्रोटियोलिसिस टार्गेटिंग काइमेरा (प्रोटैक) दवा है।
इन मरीजों के लिए उपयोगी है यह दवा
वेपडेजेस्ट्रेंट एक मौखिक (ओरल) दवा है। एंडोक्राइन थेरेपी लेने के बाद बिमारी बढऩे वाले रोगियों के लिए यह दवा है। इससे उपचार को अधिक सटीक और व्यक्तिगत बनाने में मदद मिलेगी। एफडीए ने गार्डेंट360 सीडीएक्स को भी कंपैनियन डायग्नोस्टिक के रूप में मंजूरी दी। यह एक विशेष प्रयोगशाला परीक्षण है। इसका उपयोग स्तन कैंसर के मरीजों में ईएसआर1 म्यूटेशन की पहचान करने के लिए होगा।
वेपडेजेस्ट्रेंट की मंजूरी फेज-3 वेरिटैक-2 क्लिनिकल ट्रायल के आधार पर दी गई। इस अध्ययन में ईएसआर1-म्यूटेशन वाले मरीजों में इस दवा ने बेहतर परिणाम दिए। मरीजों में मध्य प्रोग्रेशन-फ्री सर्वाइवल 5.0 महीने दर्ज किया गया। जबकि मौजूदा मानक दवा फुल्वेस्ट्रेंट के साथ यह केवल 2.1 महीने था। इसी तरह ऑब्जेक्टिव रिस्पॉन्स रेट 19 प्रतिशत रहा। फुल्वेस्ट्रेंट समूह में यह केवल 4 प्रतिशत था। नई दवा रोग की प्रगति को अधिक समय तक नियंत्रित रखने में सक्षम हो सकती है।










