नई दिल्ली। जेनेरिक दवाइयां गुणवत्ता में महंगी ब्रांडेड दवाओं के समान पाई गई हैं। एक गुणवत्ता अध्ययन में यह बात सामने आई है। महंगी ब्रांडेड दवाओं और सस्ती जेनेरिक दवाओं के बीच गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं है। कुछ शीर्ष ब्रांडों की कीमतें उसी दवा के लिए 14 गुना तक अधिक हो सकती हैं।

यह है मामला

केरल स्थित संस्था मिशन फॉर एथिक्स एंड साइंस इन हेल्थकेयर ने जेनेरिक बनाम ब्रांडेड ड्रग्स क्वालिटी प्रोजेक्ट चलाया था। इसमें ये परिणाम सामने आए हैं। इनमें हृदय रोग, मधुमेह, यकृत विकार, संक्रमण आदि की 22 दवाओं का परीक्षण किया गया।

इस परियोजना का नेतृत्व साइरियाक एबी फिलिप्स ने किया। इन्हें लोकप्रिय रूप से द लिवर डॉक के नाम से जाना जाता है। उन्होंने बताया कि सस्ते दवाओं के प्रति डर और अविश्वास अक्सर रोगियों को उपचार छोडऩे के लिए मजबूर करते हैं। इसके गंभीर स्वास्थ्य परिणाम होते हैं।