नई दिल्ली। दवा ओज़ेम्पिक का वेट लॉस के लिए इस्तेमाल करने पर दिल्ली उच्च न्यायालय सख्त हुआ है। इस बारे में केंद्र सरकार से जवाब तलब किया गया है। HC ने इस मामले में मिशाल बिल्डर्स पर सुनवाई करते हुए सीडीएससीओ से जवाब मांगा है।
हाफनामा प्लेसमेंट का निर्देश
यूनिवर्सल प्रोडक्ट्स चौकसे की याचिका पर केंद्र सरकार और डीजीसीआई ने नोटिफिकेशन जारी किया। अदालत ने इस मामले में चार सप्ताह का विस्तृत हलफनामा भुगतान करने का निर्देश दिया है। केस की अगली सुनवाई 21 मई को तय हो गई है।
नामांकन पत्र में कहा गया कि ओज़ेम्पिक सहित कुछ दवाओं के ऑफ-लेबल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। भारत में इन औषधियों के वजन को आसान उपाय के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। यह भी दावा किया गया कि कई मामलों में ये दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे के भी उपलब्ध हो रही हैं। यह गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। अदालत ने इन दवाओं की बिना पर्याप्त नियमन के उपलब्धता पर चिंता जताई थी। उस समय अदालत ने सीडीएससीओ को निर्देश दिया था कि वह इस मुद्दे की जांच करे। दवा कंपनियों सहित सभी संबंधित पक्षों से सलाह कर तीन महीने के भीतर तर्कसंगत निर्णय लेने को कहा था।
अब याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीडीएससीओ ने इस मामले में कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया। एजेंसी की ओर से केवल अनौपचारिक बातचीत कर यह कहा गया कि मामला विचाराधीन है। कई बार पत्राचार करने के बावजूद कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया। तय समयसीमा के भीतर फैसला न लेना अदालत के आदेश की अवमानना के दायरे में आता है।










