नई दिल्ली। इलाज में लापरवाही से अस्पताल पर 58 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। यह फैसला दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सुनाया। फोर्टिस, फ़्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढल अस्पताल को घोर मेडिकल लापरवाही का दोषी ठहराया। उन्हें एक मृत मरीज के बेटे को 58 लाख से ज्यादा का भुगतान करने का आदेश दिया। यह मामला कटवरिया सराय गांव के निवासी सचिन की अपने पिता की मृत्यु के बाद दर्ज कराई शिकायत से शुरू हुआ था।

यह है मामला

सडक़ दुर्घटना में लगी चोटों के इलाज के लिए भर्ती होने पर अस्पताल में कुमार को बेडसोर हो गया। एक प्लास्टिक सर्जन ने वैक्यूम असिस्टेड क्लोजर ड्रेसिंग का इस्तेमाल करने की सलाह दी। यह ऐसे गंभीर घावों के लिए एक मानक इलाज है। बावजूद इसके अस्पताल इस प्रक्रिया को करने में नाकाम रहा।

प्रतिवादी अस्पताल ने दावा किया कि ड्रेसिंग के उपकरण उपलब्ध नहीं थे। मरीज के तीमारदारों ने न तो इसके लिए सहमति दी थी। न ही खुद ये उपकरण लाकर दिए थे। आयोग ने इन दलीलों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया। उपकरणों की कमी किसी मरीज के जीवन के अधिकार के उल्लंघन को सही नहीं ठहरा सकती। गंभीर इलाज को उपकरणों की व्यवस्था करने पर निर्भर बनाना लापरवाही भरा तरीका है। किसी एक्सपर्ट की सलाह का पालन न करना और गंभीर मरीज को छुट्टी देना व्यवस्थागत विफलता थी। आयोग ने शिकायतकर्ता को 58 लाख के भुगतान का निजी अस्पताल को निर्देश दिया।

भुगतान नहीं करने पर 6 फीसदी सालाना की दर से ब्याज

आयोग ने आदेश दिया कि कुल राशि का भुगतान 22 मई, 2026 तक कर दिया जाए। ऐसा न करने पर, 6 फीसदी सालाना की दर से ब्याज लगाया जाएगा।