नई दिल्ली। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने प्राथमिकता वाले मेडिकल डिवाइस और डायग्नोस्टिक तकनीकें देश में विकसित करने के लिए सात प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों का चयन किया है। इन्हें ‘सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च’ के रूप में स्थापित किया जाएगा, जो अगले पांच साल तक तय तकनीकों के विकास का नेतृत्व करेंगे।
चयनित संस्थानों में पांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) शामिल हैं: IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली, IIT कानपुर, IIT खड़गपुर और IIT मद्रास। IIT खड़गपुर का ‘प्रगतिकार’ (PRAGATICAR) केंद्र कम लागत वाली (फ्रुगल) डायग्नोस्टिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करेगा। IIT मद्रास में प्रोफेसर मोहनसंकर शिवप्रकाशम के नेतृत्व में ‘तरंगम’ (TARaNGaM) हब अगली पीढ़ी के मेडिकल डिवाइस और डायग्नोस्टिक्स के विकास को तेज करेगा।
इन केंद्रों के प्रस्तावित कार्यों में कम जोखिम वाले निगरानी उपकरणों से लेकर उच्च जोखिम वाले जीवन रक्षक उपकरण तक शामिल हैं। पोर्टेबल स्क्रीनिंग प्लेटफॉर्म, पॉइंट-ऑफ-केयर जांच, रोकी जा सकने वाली अंधता से बचाव और रक्त वाहिकाओं की चोटों के इलाज से जुड़े उपकरणों पर भी काम होगा।
चयन में उन संस्थानों को प्राथमिकता दी गई, जिनके पास तेजी से प्रोटोटाइप बनाने और तकनीक इनक्यूबेशन का अनुभव है। मेजबान संस्थानों को ऐसा तंत्र बनाना होगा जो अनुदान अवधि खत्म होने के बाद भी आत्मनिर्भर रूप से चलता रहे। इस पहल से मेडिकल उपकरणों के लिए आयात पर निर्भरता घटने और भारतीय मरीजों की जरूरत के अनुसार उपकरण विकसित होने की उम्मीद है।
