नई दिल्ली। फार्मा क्षेत्र में रूस के बाजार में भारत ने बड़ी छलांग लगाई है। दोनों देशों में व्यापार को नई ऊंचाई तक ले जाने की तैयारी तेज हो गई है। रूस को निर्यात बढ़ाने के लिहाज से करीब 300 उत्पाद चिन्हित किए हैं। इनमें भारतीय कंपनियों के लिए बड़ी संभावनाएं हैं। फार्मा और केमिकल जैसे क्षेत्रों में इन उत्पादों की रूसी बाजार में भारी मांग है। मौजूदा समय में इस मांग की पूर्ति पूरी तरह नहीं हो पा रही है। दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखे हुए हैं।

वर्तमान में भारत का इन उत्पादों का रूस को निर्यात केवल 1.7 अरब डॉलर है। जबकि रूस का कुल आयात 37.4 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। यह बड़ा अंतर बताता है कि भारतीय निर्यातकों के पास रूस में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर है। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाकर व्यापार संतुलित किया जा सकता है। वहीं रूस के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को भी कम किया जा सकता है।

व्यापार घाटा घटाने का मौका

भारत के लिए यह अंतर पूरक निर्यात का बड़ा अवसर है। फिलहाल भारत और रूस के बीच व्यापार घाटा करीब 59 अरब डॉलर का है। यदि चयनित 300 उत्पादों पर फोकस करें तो घाटा कम हो सकता है। फार्मा सेक्टर भी भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। भारत फिलहाल रूस को 54.6 करोड़ डॉलर की फार्मा आपूर्ति करता है। जबकि रूस का कुल फार्मा आयात बिल 9.7 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। ऐसे में जेनेरिक दवाइयों और एपीआई यानी सक्रिय फार्मा सामग्री में भारत के लिए बड़ा विस्तार संभव है।