नई दिल्ली: डॉक्टर बनने का सपना देख रहे छात्रों के लिए राहत की खबर है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की नई सीट मैट्रिक्स में एमबीबीएस की 450 सीटें और जोड़ी गई हैं। इसके साथ ही देश में एम्स जैसे राष्ट्रीय संस्थानों को छोड़कर एमबीबीएस की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 1,40,664 हो गई है।
सरकारी और निजी सीटों का ब्योरा
एनएमसी के नए आदेश के मुताबिक, कुल 1,40,664 एमबीबीएस सीटों में से:
- सरकारी मेडिकल कॉलेजों में: 64,121 सीटें
- निजी मेडिकल कॉलेजों में: 76,543 सीटें
नई सीटें मेडिकल कॉलेजों में चल रही दाखिला प्रक्रिया के बीच ही जोड़ी गई हैं। राज्यों में सबसे ज्यादा फायदा महाराष्ट्र को हुआ है, जहां 150 सीटों का इजाफा हुआ है।
सरकारी कॉलेज में ज्यादा छात्रों को मौका
सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 64 हजार से ज्यादा सीटें उन छात्रों के लिए बड़ी उम्मीद हैं, जो निजी कॉलेजों की भारी फीस नहीं चुका सकते। सरकारी कॉलेजों में फीस काफी कम होती है और पढ़ाई के साथ बड़े सरकारी अस्पतालों में क्लिनिकल अनुभव भी मिलता है।
मंजूर सीटों से ज्यादा दाखिला लेने पर कार्रवाई
एनएमसी ने मेडिकल कॉलेजों को सख्त चेतावनी दी है कि वे मंजूर सीटों से ज्यादा छात्रों का दाखिला न लें। कॉलेजों को सिर्फ उतनी ही एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश देना होगा, जितनी सीटें एनएमसी ने मंजूर और अधिसूचित की हैं। तय क्षमता से अधिक छात्रों को दाखिला देने वाले कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसे दाखिले छात्रों के भविष्य के लिए भी जोखिम भरे हो सकते हैं, क्योंकि अनधिकृत सीट पर ली गई डिग्री की मान्यता पर सवाल उठ सकते हैं।
छात्र और अभिभावक रखें ये सावधानियां
- किसी भी कॉलेज में दाखिला लेने से पहले एनएमसी की वेबसाइट पर उस कॉलेज की मान्यता और स्वीकृत सीटों की संख्या जांच लें।
- केवल आधिकारिक काउंसलिंग (एमसीसी या राज्य काउंसलिंग) के जरिए ही प्रवेश लें।
- मैनेजमेंट कोटा या “पक्की सीट” दिलाने का दावा करने वाले एजेंटों से सावधान रहें।
- फीस का भुगतान केवल कॉलेज के आधिकारिक खाते में करें और रसीद जरूर लें।
डॉक्टरों की कमी दूर करने की कोशिश
सरकार पिछले कुछ वर्षों से मेडिकल सीटें लगातार बढ़ा रही है, ताकि देश में डॉक्टरों की कमी दूर की जा सके और ग्रामीण इलाकों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें। सीटें बढ़ने से हर साल नीट यूजी देने वाले लाखों छात्रों में से ज्यादा छात्रों को डॉक्टर बनने का मौका मिलेगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सीटें बढ़ाने के साथ फैकल्टी, अस्पताल और बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है।
स्रोत: अमर उजाला (23 सितंबर 2026)



