नई दिल्ली: नीट पीजी 2026 की काउंसलिंग का इंतजार कर रहे डॉक्टरों के लिए अच्छी खबर है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) ने पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्स की नई सीट मैट्रिक्स जारी कर दी है। इस साल एमडी, एमएस और पीजी डिप्लोमा की सीटें करीब 11 प्रतिशत बढ़कर लगभग 58,000 हो गई हैं, यानी पिछले साल के मुकाबले 5,800 से ज्यादा सीटों का इजाफा हुआ है।

कुल 63,177 स्वीकृत पीजी सीटें

एनएमसी की पूरी पीजी मैट्रिक्स में सभी तरह के संस्थानों को मिलाकर कुल 63,177 स्वीकृत सीटें दर्ज हैं:

  • सरकारी संस्थान: 33,088 सीटें
  • निजी संस्थान: 21,892 सीटें
  • डीम्ड संस्थान: 8,197 सीटें

इनमें एमडी, एमएस, डीएनबी और पीजी डिप्लोमा जैसे कोर्स शामिल हैं।

इन ब्रांच में बढ़ीं सीटें

नई सीट मैट्रिक्स में कई प्रमुख स्पेशलिटी में सीटों का विस्तार किया गया है। इनमें एनेस्थीसिया, ऑप्थेल्मोलॉजी (नेत्र रोग), ईएनटी, पैथोलॉजी, साइकियाट्री (मनोरोग) और रेस्पिरेटरी मेडिसिन शामिल हैं। ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी (ओबीजी) में 2,635 सीटें उपलब्ध हैं।

मंजूर सीटों से ज्यादा दाखिला नहीं

एनएमसी ने मेडिकल कॉलेजों को साफ निर्देश दिया है कि वे केवल मंजूर सीटों की संख्या के आधार पर ही प्रवेश दें। तय क्षमता से ज्यादा दाखिला लेने पर कार्रवाई की जा सकती है।

काउंसलिंग प्रक्रिया

दिव्यांग (पीडब्ल्यूबीडी) उम्मीदवारों के लिए राउंड 1 का रजिस्ट्रेशन 1 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। उम्मीदवार एमसीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन और चॉइस फिलिंग कर सकेंगे। एमसीसी अखिल भारतीय कोटे और डीम्ड व केंद्रीय विश्वविद्यालयों की सीटों के लिए काउंसलिंग कराती है, जबकि राज्य कोटे की सीटों के लिए संबंधित राज्यों की काउंसलिंग समितियां प्रक्रिया चलाती हैं।

उम्मीदवार किन बातों का रखें ध्यान

  • सीट मैट्रिक्स को ध्यान से देखकर ही चॉइस फिलिंग करें।
  • अपनी रैंक, कैटेगरी और पिछले साल की कटऑफ के आधार पर कॉलेज और ब्रांच की प्राथमिकता तय करें।
  • ज्यादा से ज्यादा विकल्प भरें, ताकि सीट मिलने की संभावना बढ़े।
  • सभी जरूरी दस्तावेज और प्रमाणपत्र पहले से तैयार रखें।
  • काउंसलिंग से जुड़ी हर सूचना के लिए केवल एमसीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर भरोसा करें।

सीटों में बढ़ोतरी से इस बार ज्यादा डॉक्टरों को विशेषज्ञता की पढ़ाई का मौका मिलेगा। इससे आने वाले वर्षों में देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी कुछ हद तक दूर होने की उम्मीद है। हालांकि अंतिम दाखिला उम्मीदवार की रैंक, श्रेणी और काउंसलिंग नियमों पर ही निर्भर करेगा।

स्रोत: टाइम्स नाउ नवभारत, वनइंडिया हिंदी, संदेश वाहक