आगरा (उप्र)। दवाइयां जीएसटी घटने के बाद भी महंगी हो गई हैं। फार्मा कंपनियों ने दवाओं की एमआरपी 10 प्रतिशत बढ़ा दी है। मरीजों को सस्ती दवाएं देने के लिए जीएसटी घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया था। इसके आधार पर फार्मा कंपनियों को दवाओं की एमआरपी कम करनी थी।

कंपनियों ने दवाओं की नई खेप की एमआरपी 10 प्रतिशत और बढ़ा दी है। इससे दवाएं महंगी हो गईं हैं। इसके चलते से दवा कारोबारियों के होश उड़े हुए हैं। आगरा फार्मा एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी पुनीत कालरा ने बताया कि कंपनियों ने नई एमआरपी की दवाएं सप्लाई की हैं। पहले दवाओं पर 12 प्रतिशत जीएसटी थी। उन पर पांच प्रतिशत जीएसटी होने पर एमआरपी 6. 25 प्रतिशत कम होनी थी। यूकोमेल्ट ए पर एमआरपी 132.35 रुपये है। इस दवा पर कंपनी ने जीएसटी पांच प्रतिशत करने के बाद एमआरपी 10 प्रतिशत बढ़ा दी है। इससे एमआरपी कम होने के बजाय बढ़ गई है। इसी तरह से अन्य दवाओं की एमआरपी भी बढ़ा दी गईं हैं।

दवाओं पर जीएसटी कम होने के बाद की एमआरपी

1. म्यूकोमेल्ट ए पहले एमआरपी 128.70 रुपये थी। अब एमआरपी 132.35 रुपये है।
2. फ्लूटीवेज नेजल स्प्रे पहले एमआरपी 518 रुपये थी। अब एमआरपी 534 रुपये है।
3. सिरप एक्सोरिल फ्लू पहले एमआरपी 104.50 रुपये थी। अब एमआरपी 107.34 रुपये हो गई है।
4. कैप्सूल सोमप्राज डी 40 पहले एमआरपी 265 थी। अब एमआरपी 280 रुपये है।

सहायक औषधि आयुक्त अतुल उपाध्याय ने बताया कि जो दवाएं एनपीपीए में आती हैं। उनके अधिकतम मूल्य निर्धारित हैं। इसमें कैंसर, हृदय रोग सहित तीन हजार से अधिक दवाओं के साल्ट हैं। अन्य दवाओं की एमआरपी पर कोई नियंत्रण नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। कंपनियां जीएसटी ज्यादा ले रहीं हैं तो कार्रवाई की जाएगी।