गुरुग्राम (हरियाणा)। एफडीए की रेड में मिड्यूटी कंपनी फंस गई है। वेबसाइट पर नसों और जोड़ों के दर्द से राहत के बड़े दावे के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं। निरीक्षण के दौरान अपेक्षित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। फाजिलपुर झाड़सा स्थित मिडविजन के मिड्यूटी ब्रांड के उत्पाद एफडीए की जांच दायरे में हैं।
एफडीए गुरुग्राम की टीम ने कंपनी की वेबसाइट पर प्रकाशित स्वास्थ्य संबंधी दावे देखे। एफडीए की रेड में इनकी पड़ताल के लिए कंपनी परिसर का निरीक्षण किया। जांच में नौ खाद्य उत्पादों के मिसब्रांडिंग से संबंधित होने का संदेह मिला है। यानी मामला उपभोक्ताओं के सामने पेश किए जा रहे दावों की सत्यता का भी है।
दावों की लंबी फेहरिस्त
कंपनी की वेबसाइट पर कुछ उत्पादों को कब्ज से राहत, फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार का दावा किया है। वहीं लिवर डिटाक्स, रक्त में शुगर नियंत्रण और त्वचा की रंजकता कम करने में सहायक बताया गया था। कुछ दावे नसों और जोड़ों के दर्द में राहत से भी जुड़े थे।
इनमें से कुछ दावे बीमारियों की रोकथाम, उपचार या लक्षणों में राहत का संकेत देते प्रतीत हुए। ऐसे में कंपनी के प्रतिनिधि से दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण और संबंधित नियामकीय दस्तावेज मांगे। निरीक्षण के समय अपेक्षित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
नौ खाद्य, नौ कास्मेटिक उत्पादों के नमूने लिए
इस कार्रवाई में पांच अधिकारी शामिल रहे। नौ खाद्य और नौ कास्मेटिक उत्पादों के नमूने जांच के लिए लिए। कंपनी का एफएसएसएआइ लाइसेंस, जीएसटी प्रमाणपत्र, पंजीकरण प्रमाणपत्र भी लिया गया। इनके विज्ञापनों के नियामकीय अनुपालन की भी पड़ताल होगी।
अब नोटिस से खुलेगा दावों का हिसाब
औषधि नियंत्रण अधिकारी डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि कंपनी को नोटिस भी दिया जाएगा। कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। उसके जवाब और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल, मिड्यूटी के उत्पादों के बारे में नमूनों की जांच की जा रही है।





