नई दिल्ली। वेट-लॉस दवा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मार्च के आंकड़ों में मौनजारो (Mounjaro ) की बिक्री में गिरावट आई है। वहीं, सेमाग्लूटाइड बेस्ड दवाओं ने भारतीय बाजार में मजबूत पकड़ बनाई है। दवा मौनजारो की मार्च महीने में बिक्री घटकर लगभग 114 करोड़ रुपए रह गई है। यह फरवरी में 135 करोड़ रुपए थी। दिसंबर के बाद इसकी बिक्री में यह सबसे बड़ी गिरावट है।

इसके बावजूद Mounjaro भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली वेट-लॉस दवा बनी हुई है। कई ब्रांड्स से आगे है। सेमाग्लूटाइड से जुड़ी दवाओं की बिक्री में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। मार्च में इसकी बिक्री बढक़र 59 करोड़ रुपए हो गई। यह फरवरी में 48 करोड़ रुपए थी। दिलचस्प यह है कि सेमाग्लूटाइड जेनरिक्स की शुरुआत मार्च के अंत में हुई थी।

इसके बावजूद इसकी मजबूत मांग देखने को मिल रही है। हालांकि, सेमाग्लूटाइड सेगमेंट में अब भी डेनमार्क की कंपनी Novo Nordisk का दबदबा है। कंपनी ने अकेले 45 करोड़ रुपए का योगदान दिया है। यह कुल सेमाग्लूटाइड बिक्री का लगभग 76 फीसदी है। संभावना है कि अप्रैल से लागू Novo Nordisk की 36-48 फीसदी कीमत कटौती के बाद सेमाग्लूटाइड की मांग और तेज हो सकती है। जेनरिक लॉन्च भी इस सेगमेंट को और कॉम्पिटिटिव बना सकते हैं। Torrent ने 4.7 करोड़ की बिक्री के साथ 8 फीसदी बाजार हिस्सेदारी हासिल की है।

वहीं Sun Pharma , Dr. Reddy’s और Lupin जैसी कंपनियों की हिस्सेदारी अभी सीमित है। आने वाले समय में इनके बढऩे की संभावना जताई जा रही है। वेट-लॉस दवाओं को लेकर दुनियाभर में कॉम्पीटीशन तेज हो गया है। Eli Lilly ने अमेरिका में एक नई ओरल वेट-लॉस दवा Orforglipron लॉन्च की है। यह Novo Nordisk की ओरल Wegovy जैसी दवाओं को चुनौती दे सकती है।