लखनऊ (यूपी)। प्राइवेट अस्पतालों की फार्मेसी बंद करने के आदेश दिए हैं। इन पर अधिक कीमत पर दवाएं बेची जा रही थीं। एफएसडीए अभियान में मामला सामने आया है। इसके बाद कई फार्मेसी को बंद करने के आदेश हुए हैं। नकली दवाओं के शक में 38 नमूने भी लिए गए हैं।
यह है मामला
ड्रग इंस्पेक्टर की टीमों ने 12 निजी अस्पतालों की फार्मेसी की जांच की। इस दौरान दवाओं के खरीद और बिक्री मूल्य की कीमतों में अंतर मिला। यह जानकारी एफएसडीए के सहायक मंडल आयुक्त ब्रजेश कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि कुछ फार्मेसी को जीवनरक्षक दवाएं एमआरपी से काफी कम कीमत पर मिल रही थीं। हालांकि, मरीजों को ये दवाएं एमआरपी पर बेची जा रही थीं।
ऐसी दवाओं को चिह्नित कर नमूने लिए गए। अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल फार्मेसी में दवाओं के रजिस्टर प्रस्तुत नहीं किए। रिकॉर्ड में बैच नंबर भी नहीं मिले। इन खामियों पर फार्मेसी बंद करने के निर्देश दिए गए। ग्लोब हॉस्पिटल में दवाओं की खरीद-बिक्री के अभिलेख नहीं मिले। दवाएं दो स्थानों पर रखी मिलीं। इनमें से एक स्थान सील कर दिया गया। रीजेंसी अस्पताल में दवाओं के बैच नंबर में भी विसंगति मिली। डॉ. केएनएस मेमोरियल, शेखर हॉस्पिटल समेत अन्य जगहों पर भी स्टॉक और अभिलेखों में अंतर मिला। फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति, बिलिंग , भंडारण से जुड़ी खामियां मिली हैं।










