चंडीगढ़। नशीली दवा बिक्री मामले में फार्मा कंपनी मालिक की जमानत याचिका कैंसिल हो गई है। हरियाणा हाईकोर्ट ने ड्रग डायवर्जन से जुड़े केस में प्रमुख आरोपी परशोत्तम लाल गोयल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति सुमीत गोयल ने कहा कि कथित साजिश का खुलासा करने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। यह आदेश ऐसे समय आया है जब अनुमान लगाया जा रहा है कि यह रैकेट लगभग 600 करोड़ रुपये का है। जब्त की गई वस्तुएं हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब में स्थित दवा इकाइयों से जुड़ी हैं।

यह है मामला

अमृतसर में 5,000 ट्रामाडोल टैबलेट की जब्ती के साथ जांच शुरू हुई। यह एक व्यापक जांच में तब्दील हो गई। इसमें वैध लाइसेंस के तहत निर्मित नियंत्रित दवाओं की सप्लाई का खुलासा हुआ। इन्हें गैर-मौजूद या फर्जी चिकित्सा एजेंसियों को भेजा जा रहा था। एनसीबी ने अंबाला स्थित व्यवसायी और काला अंब में डिजिटल विजन के भागीदार गोयल के खिलाफ मामला दर्ज किया।

शिकायत में बरामद की गई 13 प्रमुख वस्तुओं का उल्लेख है। इनमें ट्रामाडोल और अल्प्राज़ोलम की लाखों गोलियां और कैप्सूल शामिल हैं। वहीं 9 लाख बोतल कोडीन फॉस्फेट कफ सिरप भी शामिल हैं। इससे यह क्षेत्र में कथित तौर पर दवाओं की हेराफेरी के सबसे बड़े मामलों में से एक बन गया है।