नई दिल्ली। फार्मा निर्यात पर युद्ध से 5,000 करोड़ तक का प्रभाव पड़ सकता है। भारतीय फार्मास्युटिकल निर्यात संवर्धन परिषद ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं। माल ढुलाई को लेकर अनिश्चितता सबसे प्रमुख है। इसके चलते फार्मा निर्यात काफी हद तक प्रभावित होने की संभावना है। इसमें विशेष रूप से जीसीसी और वाना क्षेत्रों को होने वाले निर्यात शामिल हैं।
संगठन ने कहा कि मार्च में भारतीय फार्मा उद्योग को 5,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। भारत के कुल निर्यात में जीसीसी देशों का हिस्सा 5.58 फीसदी है। वाना देशों को निर्यात बढक़र 2024-25 में 1,749.68 मिलियन डॉलर हो गया है।
माल ढुलाई शुल्क दोगुना होने और अतिरिक्त शुल्क लगने से फार्मा कंपनियों पर काफी दबाव पड़ा है। खाड़ी शिपिंग कॉरिडोर जैसे प्रमुख मार्गों पर मार्ग परिवर्तन या देरी का खतरा मंडरा रहा है। इससे डिलीवरी शेड्यूल प्रभावित हो सकता है। तापमान के प्रति संवेदनशील उत्पादों के लिए यह विशेष रूप से चिंताजनक है। इसका एक और परिणाम आपूर्ति श्रृंखला में लागत में वृद्धि है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, एपीआई और तैयार फॉर्मूलेशन के लिए बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत और शिपिंग में देरी से इन्वेंट्री चक्र प्रभावित होना तय है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ओमान, कुवैत और यमन सस्ती दवाओं के लिए भारत पर निर्भर हैं।










