नई दिल्ली: नई दवाएं खोजने वाले भारतीय स्टार्टअप और छोटे उद्योगों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा अवसर खोला है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल्स विभाग ने 5,000 करोड़ रुपये की ‘फार्मा और मेडटेक में अनुसंधान एवं नवाचार प्रोत्साहन’ (पीआरआईपी) योजना के तहत एक नया ‘न्यू डिस्कवरी’ ट्रैक शुरू किया है। इसके तहत स्टार्टअप और एमएसएमई को प्रति कंपनी, प्रोजेक्ट या प्रोजेक्ट्स के समूह के लिए 50 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है।

न्यू डिस्कवरी ट्रैक की मुख्य बातें

  • नई दवाओं और थेरेपी पर काम करने वाले स्टार्टअप और एमएसएमई पात्र होंगे।
  • प्रति कंपनी, प्रोजेक्ट या पोर्टफोलियो के लिए 50 करोड़ रुपये तक की सहायता।
  • शुरुआती चरण (टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल यानी टीआरएल 1 से 3) के प्रोजेक्ट को टीआरएल 6 तक ले जाने के लिए मदद।
  • आवेदक को प्रोजेक्ट लागत का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा प्रामाणिक संस्थागत निवेशकों से जुटाना होगा।

पीआरआईपी योजना का दूसरा चरण

पीआरआईपी योजना 2023 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य फार्मा और मेडिकल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं। विभाग ने 28 अगस्त 2026 को योजना के दूसरे चरण (सेकेंड कॉल) के आवेदन आमंत्रित किए थे। दूसरे चरण में दो मुख्य ट्रैक हैं:

  • शुरुआती चरण: स्टार्टअप और एमएसएमई के शुरुआती प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए प्रति प्रोजेक्ट 5 करोड़ रुपये तक की सहायता।
  • बाद का चरण: बड़े प्रोजेक्ट के लिए 100 करोड़ रुपये तक की सहायता, जो कुल स्वीकृत लागत के अधिकतम 35 प्रतिशत तक सीमित होगी। बाकी लागत आवेदक को खुद लगानी होगी।

किन क्षेत्रों पर फोकस

योजना के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नई दवाएं, कॉम्प्लेक्स जेनेरिक और बायोसिमिलर तथा नए मेडिकल डिवाइस शामिल हैं। कुल 5,000 करोड़ रुपये में से 700 करोड़ रुपये सात राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों (नाइपर) में उत्कृष्टता केंद्र बनाने के लिए और 4,200 करोड़ रुपये उद्योग में अनुसंधान निवेश को तेज करने के लिए रखे गए हैं।

कैसे करें आवेदन

दूसरे चरण के लिए ऑनलाइन पीआरआईपी पोर्टल (prip.pharma-dept.gov.in) आवेदन के लिए खुला है। पात्र स्टार्टअप और एमएसएमई सीधे कॉन्सेप्ट नोट जमा कर सकते हैं। योजना के तहत मार्गदर्शन (मेंटरशिप) भी दिया जाएगा। जिन कंपनियों ने पहले चरण में प्रोजेक्ट जमा किया था, उन्हें वही प्रोजेक्ट दोबारा जमा न करने को कहा गया है। किसी भी सवाल के लिए आवेदक support-prip@pharma-dept.gov.in पर लिख सकते हैं।

भारतीय फार्मा उद्योग के लिए अहम कदम

भारत जेनेरिक दवाओं में दुनिया का अग्रणी देश है, लेकिन नई दवाओं की खोज में अब भी पीछे है। शुरुआती अनुसंधान को पूंजी की कमी सबसे ज्यादा झेलनी पड़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यू डिस्कवरी ट्रैक जैसे प्रावधान भारतीय स्टार्टअप को नई दवाओं के विकास में आगे आने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), चार्टफॉरेस्ट (1 अक्टूबर 2026)