खराब और नकली मेडिकल उपकरणों पर सख्ती: सीडीएससीओ को बिक्री रोकने और नष्ट कराने का अधिकार देने की तैयारी

नई दिल्ली: बाजार में बिक रहे खराब, घटिया या नकली मेडिकल उपकरणों पर अब तेजी से रोक लग सकेगी। केंद्र सरकार मेडिकल डिवाइस नियम (एमडीआर), 2017 के नियम 30(1) में संशोधन पर विचार कर रही है। प्रस्तावित बदलाव के तहत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों को ऐसे उपकरणों का उत्पादन, बिक्री और वितरण तुरंत रोकने और उन्हें निगरानी में नष्ट कराने का स्पष्ट कानूनी अधिकार मिल जाएगा।

क्या है प्रस्ताव

प्रस्तावित संशोधन के बाद नियामक उन मेडिकल डिवाइस के खिलाफ सीधी कार्रवाई कर सकेंगे, जो असुरक्षित, खराब, मानक से कम (सबस्टैंडर्ड) या नकली (स्प्यूरियस) पाए जाएंगे। इसमें शामिल हैं:

  • तुरंत रोक का आदेश: निर्माता, आयातक और वितरक को ऐसे उपकरणों का उत्पादन, बिक्री और अस्पतालों में सप्लाई तुरंत रोकने का निर्देश।
  • निगरानी में नष्ट करना: असुरक्षित उत्पादों को अधिकारियों की निगरानी में नष्ट कराने का अधिकार।
  • केंद्र और राज्य दोनों को अधिकार: सीडीएससीओ के साथ राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण भी यह कार्रवाई कर सकेंगे।

क्यों पड़ी जरूरत

अब तक की व्यवस्था मुख्य रूप से लाइसेंस से जुड़ी कार्रवाई पर आधारित है, जैसे लाइसेंस निलंबित या रद्द करना। लेकिन किसी विशेष खराब उत्पाद को बाजार से तुरंत हटाने के लिए स्पष्ट प्रावधानों की कमी थी। अधिकारियों का कहना है कि इस संशोधन का मकसद असुरक्षित उत्पादों को मौजूदा व्यवस्था की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से बाजार से हटाना है।

इम्प्लांट, सर्जिकल उपकरण, डायग्नोस्टिक मशीनें और कंज्यूमेबल्स, सभी इन नियमों के दायरे में आते हैं। इनका रोज अस्पतालों में इस्तेमाल होता है, जहां किसी भी खराबी का सीधा असर मरीज की जान पर पड़ सकता है।

उद्योग की चिंता

हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर उद्योग जगत में कुछ चिंताएं भी हैं। मेडिकल बायर की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ लोगों को आशंका है कि नए अधिकारों के इस्तेमाल में अधिकारियों के विवेक की भूमिका ज्यादा होगी। अब तक किसी उद्योग संगठन ने इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है।

निर्माताओं को क्या करना चाहिए

विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल डिवाइस कंपनियों को अपनी गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था, उत्पादों की ट्रेसबिलिटी (हर बैच का रिकॉर्ड) और रिकॉल प्रक्रिया को मजबूत करना चाहिए। आगे यह देखना होगा कि अंतिम संशोधन कब अधिसूचित होता है और सीडीएससीओ ट्रेसबिलिटी, रिकॉल और उत्पाद नष्ट करने की प्रक्रिया पर क्या दिशा-निर्देश जारी करता है।

मरीजों के लिए क्या मायने

मरीजों के लिए यह प्रस्ताव सुरक्षा की दृष्टि से अहम है। अगर किसी स्टेंट, इम्प्लांट या जांच उपकरण में खराबी सामने आती है, तो उसे पूरे देश में तेजी से हटाया जा सकेगा, जिससे और मरीजों को नुकसान पहुंचने से रोका जा सकेगा।

स्रोत: मेडिकल बायर (23 सितंबर 2026), ईटी स्मॉल बिजनेस रिपोर्ट पर आधारित

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