नई दिल्ली। वेट लॉस की दवा में अजगर के खून का इस्तेमाल करना प्रभावी पाया गया है। इसके कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होंगे। शोधकर्ताओं ने ऐसा दावा किया है।

वजन कम करने के लिए अभी तक जहां डाइट, वर्कआउट, लाइफस्टाइल पर ध्यान देते थे। कुछ समय पहले लोग वेट लॉस दवाइयों का भी इस्तेमाल करने लगे हैं। अब वैज्ञानिकों ने मोटापे से लडऩे की दिशा में एक और सफलता पाई है। आमतौर पर वजन कम करने वाली मौजूदा दवाओं के साथ साइड इफेक्ट्स देखने को मिलते हैं। अब रिसर्चर्स ने अजगर के खून में भूख को कंट्रोल करने वाला मॉलिक्यूल खोज निकाला है।

इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है। इस स्टडी में पाया गया कि यह नेचुरल कंपाउंड सीधे दिमाग के उस हिस्से पर काम करता है, जो भूख को नियंत्रित करता है। इस संबंध में नेचर मेटाबॉलिज्म जर्नल में रिसर्च पब्लिस हुआ है। इसके मुताबिक, इस मॉलिक्यूल की सबसे अच्छी बात यह है कि यह इंसानी शरीर में भी नेचुरल रूप से बनता है। जब अजगर भारी-भरकम शिकार निगलते हैं तो उनके खून में एक खास मॉलिक्यूल का लेवल 1000 गुना तक बढ़ जाता है। इसी की मदद से वे महीनों तक बिना खाए-पिए एनर्जेटिक बने रहते हैं। जब वैज्ञानिकों ने इस कंपाउंड को लैब में चूहों को दिया तो चूहों ने खाना कम कर दिया। बिना किसी फिजिकल कमजोरी या मसल्स लॉस के उनका वजन कम होने लगा।

अभी मार्केट में जो वेट लॉस दवाइयां मौजूदा हैं, उनसे पेट से जुड़ी परेशानियां हो रही हैं। अजगर के मॉलिक्यूल का जब टेस्ट किया गया तो ऐसी कोई बात सामने नहीं आई। राहत की बात यह है कि यह मॉलिक्यूल इंसानों में भी पाया जाता है। जब हम भरपेट खाना खाते हैं, तो हमारे शरीर में भी इसका स्तर थोड़ा बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्राकृतिक मॉलिक्यूल के आधार पर भविष्य में ऐसी दवाएं बनाई जा सकती हैं। जिनसे बिना साइड इफेक्ट के मोटापा कम होगा।