मद्रास (चेन्नई)। दवा पियोग्लिटाज़ोन और सिटाग्लिप्टिन की समीक्षा करने के निर्देश जारी हुए हैं। यह निर्देश मद्रास उच्च न्यायालय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय दिए हैं। मधुमेह की इन दोनों दवाओं की प्रभावकारिता जांचने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम गठित करने को कहा है।
डॉ. बी. मुकेश बनाम स्वास्थ्य मंत्रालय के मामले में यह निर्देष जारी किए। इसमें किफायती विकल्प के बजाय महंगी दवा को बढ़ावा देने का आरोप है। चेन्नई के एग्मोर स्थित मरकरी अस्पताल में कार्यरत मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. बी. मुकेश ने यह याचिका दायर की है। यह प्रतिवादियों के खिलाफ मुकदमेबाजी का दूसरा चरण है।
आरोप है कि तीसरे प्रतिवादी ने यह गलत धारणा फैलाई कि मधुमेह की प्रभावी दवा पियोग्लिटाज़ोन से मूत्राशय के कैंसर का खतरा है। इसके परिणामस्वरूप इस पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह कदम निजी दवा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए रची गई साजिश का हिस्सा था। इसके तहत पियोग्लिटाज़ोन से लगभग दस गुना अधिक महंगी दवा सिटाग्लिप्टिन को बढ़ावा दिया गया।










