मुजफ्फरपुर (बिहार): उत्तर बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली तस्वीर सामने आई है। अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में जांच के लिए लाए गए दर्जनों मरीजों के ब्लड सैंपल सुरक्षित रखने के बजाय खुले पैसेज में फेंके हुए मिले हैं।

चिकित्सा मानकों की अनदेखी

चिकित्सा नियमों के अनुसार मरीजों के रक्त के नमूनों को एक निश्चित तापमान पर और पूरी तरह सुरक्षित वातावरण में रखना अनिवार्य होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, एसकेएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। नमूनों को खुले में छोड़ने से उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे जांच रिपोर्ट गलत आ सकती है।

गरीब मरीजों की जांच पर सवाल

दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब मरीज घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर जांच के लिए खून देते हैं, ताकि उन्हें समय पर सही इलाज मिल सके। लेकिन सैंपल के साथ ऐसी लापरवाही से उनकी जांच रिपोर्ट संदिग्ध हो सकती है। गलत रिपोर्ट के आधार पर गलत इलाज का खतरा भी बढ़ जाता है।

अस्पताल परिसर में संक्रमण का खतरा

खुले में पड़े खून के नमूने संक्रमण फैलने का बड़ा खतरा हैं। खून के नमूनों से हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और एचआईवी जैसे संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। अस्पताल में आने वाले मरीज, उनके परिजन और सफाईकर्मी इसके सीधे संपर्क में आ सकते हैं।

क्या कहते हैं नियम

बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियमों के तहत अस्पतालों को खून के नमूनों और अन्य संक्रामक कचरे को अलग-अलग रंग के तय डिब्बों में रखकर वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करना होता है। इस्तेमाल हो चुके नमूनों को भी कीटाणुरहित करने के बाद ही निपटाया जाना चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने पर अस्पताल पर कार्रवाई का प्रावधान है।

सही जांच के लिए सैंपल की सुरक्षा क्यों जरूरी

पैथोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, खून का नमूना लेने के बाद तय समय के भीतर और उचित तापमान पर उसकी जांच होनी चाहिए। गर्मी या देरी से नमूने में मौजूद कोशिकाएं और रसायन बदल सकते हैं, जिससे शुगर, पोटैशियम, प्लेटलेट्स और कल्चर जैसी जांचों के नतीजे गलत आ सकते हैं।

स्वास्थ्य जानकारों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को इस मामले की तुरंत जांच कर जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए और लैब में सैंपल प्रबंधन की व्यवस्था को सख्त बनाना चाहिए, ताकि मरीजों का भरोसा बना रहे।

स्रोत: प्रभात खबर (सितंबर 2026)