मुंबई। फार्मा सेक्टर में ‘नेम वॉर’ की लड़ाई कोर्ट तक पहुंचने लगी है। दवाओं के नाम को लेकर कई बड़े कानूनी विवाद सामने आए हैं। कंपनियां एक-दूसरे पर नाम की नकल का आरोप लगा रही हैं। हर कोई अपने ब्रांड को बचाने में जुटा है। ये लड़ाई सिर्फ मार्केट शेयर की नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है। एक जैसे नाम जानलेवा गलती बन सकते हैं। सवाल ये है कि नाम में क्या रखा है? इस इंडस्ट्री में जवाब है-सब कुछ।
हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक भारतीय कंपनी को ‘PANTOZED-40’ नाम से दवा बेचने से रोक दिया। मामला तब उठा जब सन फार्मा ने कोर्ट में दलील दी कि ये नाम उसकी मशहूर दवा Pantocid से मिलता-जुलता है। कोर्ट ने भी माना कि दोनों नाम एक ही मॉलिक्यूल पैंटोप्राजोल से जुड़े हैं। उनकी आवाज इतनी मिलती-जुलती है कि मरीज या डॉक्टर कन्फ्यूज हो सकते हैं।
इसी तरह नोवो नॉर्डिस्क और डॉ. रेड्डीज के बीच टकराव हुआ। ये विवाद सेमाग्लूटाइड नाम के मॉलिक्यूल पर आधारित दवाओं को लेकर था। नोवो नॉर्डिस्क की दवाएं ‘Ozempic’ और ‘Wegovy’ इस सेगमेंट में काफी लोकप्रिय हैं। कोर्ट ने डॉ. रेड्डीज को ‘Olymviq’ नाम इस्तेमाल करने से रोक दिया। ये ‘Ozempic’ से मिलता-जुलता था।










