जयपुर (राजस्थान)। दवा दुकानदारों पर सरकारी आदेश की तलवार लटक गई है। औषधि लाइसेंसों के नवीनीकरण को लेकर प्रस्तावित व्यवस्था का दवा कारोबारियों ने विरोध किया है। राजधानी केमिस्ट एसोसिएशन ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर को ज्ञापन सौंपा है। कहा गया कि लाइसेंस से जुड़े प्रावधानों में बदलाव का अधिकार केंद्र सरकार को है। राज्य स्तर पर इस तरह की शर्तें लागू करना विधिसम्मत नहीं है।

ज्ञापन में उस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई गई है, जिसमें औषधि लाइसेंस के लिए दुकान का व्यावसायिक क्षेत्र में होना जरूरी है। वहीं, व्यापारिक पंजीकरण और पैन कार्ड जैसी शर्तों को अनिवार्य बताया गया है। केमिस्टों का कहना है कि इससे प्रदेशभर में दवा आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होगी।

बताया गया कि राजस्थान में करीब 90 प्रतिशत दवा दुकानें गैर-व्यावसायिक क्षेत्रों में हैं। यहां तक कि अधिकांश अस्पताल परिसरों में स्थित मेडिकल स्टोर भी व्यावसायिक क्षेत्र में नहीं आते। जयपुर शहर के कई बड़े इलाकों में भी भूमि उपयोग को व्यावसायिक घोषित नहीं किया गया है। सरकार ने नर्सिंग होम को आवासीय क्षेत्रों में संचालित करने की अनुमति दे रखी है। स्वाभाविक रूप से उनके साथ जुड़ी दवा दुकानें भी वहीं स्थित हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में मेडिकल स्टोर तकनीकी रूप से अवैध हो जाएंगे।

केमिस्टों ने कहा कि यदि नई व्यवस्था को यथावत लागू किया गया तो दवा दुकानों का नवीनीकरण रुक जाएगा। इससे डॉक्टर की ओर से लिखी दवाएं मरीजों को आसानी से उपलब्ध नहीं होंगी। इसका सीधा असर जनस्वास्थ्य पर पड़ेगा। प्रधानमंत्री जन औषधि योजना जैसी योजनाओं की पहुंच भी प्रभावित होगी। एसोसिएशन ने मंत्री से मांग की है कि इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करे।