नई दिल्ली। मेडिसिन एपीआई की कीमतें बढ़ने पर सरकार रोक लगा सकती है। दरअसल, पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई चेन में रुकावट जारी है। इससे देश में एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स और बल्क ड्रग्स की कीमतें आसमान छू रही हैं। कुछ इनपुट लागतों में तो 300 फीसदी तक का उछाल देखा गया है। ऐसे में सरकार 1955 के एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट जैसे उपायों पर विचार कर रही है। इससे इन ज़रूरी चीजों के दाम को काबू में रखा जा सकेगा।

भारत दुनिया भर में जेनेरिक दवाओं के उत्पादन में एक बड़ी शक्ति है। इसे फार्मेसी आफ द वल्र्ड भी कहा जाता है। हमारी फार्मा इंडस्ट्री और इंटरमीडिएट्स के लिए आयात पर निर्भर है। इसका लगभग 70-85 फीसदी हिस्सा चीन से आता है। पश्चिम एशिया के संकट ने पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन को भी प्रभावित किया है। नतीजतन, पैरासिटामोल API जैसी चीज़ों की कीमतें दोगुनी से भी ज़्यादा हो गई हैं। यह स्थिति उत्पादन रोकने का जोखिम पैदा करती है। यह देश की दवाओं की सप्लाई पर असर डाल सकती है।

सरकार और इंडस्ट्री का डबल एक्शन

सरकार ECA जैसे कानूनों का इस्तेमाल कर सकती है। इससे उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित किया जा सकेगा। इस बीच, फार्मा कंपनियां भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रही हैं। कंपनियां कच्चे माल के उत्पादन को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही हैं।