ई-फार्मेसी की वजह से करोड़ों रिटेल केमिस्टों का बिजनेस प्रभावित

CAIT: कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया टेडर्स (CAIT) ने दावा किया है कि ई-फार्मेसी की वजह से देश के करोड़ों रिटेल केमिस्टों का बिजनेस प्रभावित हुआ है। देश में विदेशी और घरेलू कॉर्पोरेट कंपनियां ऑनलाइन फॉर्मेसी के जरिए दवा की आपूर्ति कर ड्रग एवं कॉस्मेटिक कानून की लगातार अवहेलना कर रही है। ई-फॉर्मेसी कंपनियों ने दवाइयों की आपूर्ति से न केवल देश के करोड़ों थोक और खुदरा केमिस्टों का व्यापार प्रभावित किया है, बल्कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को खतरे में डालने का काम किया है।

प्रमुख केमिस्ट एसोसिएशनों का एक राष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित (CAIT)

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया टेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने इस संबंध में एक बयान जारी कर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए कैट ने मार्च के पहले सप्ताह में देश के विभिन्न राज्यों की प्रमुख केमिस्ट एसोसिएशनों का एक राष्ट्रीय सम्मेलन राजधानी नई दिल्ली  में आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस विषय पर भविष्य की कार्रवाई कैट सम्मेलन में तय करेगा। खंडेलवाल ने कहा कि कैट का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर उन्हें देश में ई-फार्मेसियों के नियम और क़ानून के उल्लंघन के बारे में अवगत कराएगा।

CAIT

टाटा 1 एमजी, नेटमेड्स और अमेज़ॅन फार्मेसी ने किया उल्लघंन

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि देश में दवाओं का निर्माण, आयात, बिक्री और वितरण औषधि और प्रसाधन सामग्री क़ानून और नियमों से नियंत्रित होता है। इस अधिनियम के नियम कड़े हैं और न केवल प्रत्येक आयातक, निर्माता, विक्रेता या दवाओं के वितरक के लिए एक वैध लाइसेंस का होना बहुत आवश्यक है।  यह भी अनिवार्य है कि सभी दवाओं को केवल एक पंजीकृत फार्मासिस्ट ही दे। लेकिन ई-फार्मेसी मार्केटप्लेस हमारे देश के कानून की खामियों का दुरुपयोग कर रहे हैं और बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाएं बेचकर और पंजीकृत फार्मासिस्ट के बिना दवाओं का वितरण करके निर्दोष भारतीय उपभोक्ताओं के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ई-फार्मेसी, टाटा 1 एमजी, नेटमेड्स और अमेज़ॅन फार्मेसी जैसे ई-फार्मेसी मार्केटप्लेस इन नियमों के उल्लंघन में सबसे आगे हैं। इन कंपनियों के मनमाने रवैये पर सरकार को रोक लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हीं ई-फार्मेसियों को दवा बेचने की अनुमति देनी चाहिए, जिनके पास ऑनलाइन दवाएं बेचने की अनुमति है। इसके अतिरिक्त अन्य बाकी ई-फार्मेसी को बंद करने के निर्देश जारी करना चाहिए।

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