सोलन। पैरासिटामोल, पेट के कीड़े मारने की दवा आइवरमेक्टिन सहित अन्य कई दवाएं जल्द सस्ती होने की उम्मीद है। इन दवाओं का कच्चा माल यानी एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट (एपीआइ) अब धीरे-धीरे सस्ता हो रहा है। कोरोना काल में एपीआइ के दाम में भारी वृद्धि हुई थी, जिसका असर इनके दाम पर भी पड़ा था। अब आम लोगों सहित फार्मा सेक्टर को राहत मिली है। जीवन रक्षक दवाओं में प्रयोग होने वाले एपीआइ के रेट जुलाई व अगस्त में कम हुए हैं। यदि नालागढ़ में प्रस्तावित बल्क ड्रग यूनिट की योजना धरातल पर आती है तो काफी सस्ते रेट पर फार्मा सेक्टर को कच्चा माल मिल सकता है।

कोरोना की दूसरी लहर में सबसे अधिक इस्तेमाल हुई आइवरमेक्टिन दवा के कच्चे माल का रेट भी कम हुआ है। पैरासिटामोल का एपीआइ 675 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच गया है। विटामिन सी दवा की डिमांड भी कोरोनाकाल में सबसे अधिक रही है। अब विटामिन सी की दवा का कच्चा माल भी सस्ता हुआ है। इसी तरह लेवासिट्राजिन और अन्य कई दवाओं के कच्चे माल के रेट में इस माह गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि कुछ दवाओं के कच्चे माल के रेट में बढ़ोत्तरी भी हुई है, लेकिन तीन माह में रेट इतने तेजी से नहीं बढ़े हैं, जितनी वृद्धि वर्ष 2020 से मार्च 2021 तक दर्ज की गई थी। भारत अधिकतर दवाओं के कच्चे माले के लिए चीन पर निर्भर है। कोरोना काल में दवाओं की मांग बढऩे पर कच्चे माल की आपूर्ति भी प्रभावित हुई थी।
सोलन फार्मास्यूटिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद गुप्ता का कहना है कि यदि कोरोना की तीसरी लहर नहीं आती है तो एपीआइ के रेट और कम होने की उम्मीद है। यदि आने वाले दिनों में कोरोना के मामले बढ़ते हैं तो इसका असर एपीआइ के रेट पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल दाम कम हुए हैं, लेकिन अब भी रेट काफी अधिक हैं।

इन दवाओं का एपीआइ हुआ सस्ता (रुपये प्रतिकिलो)

दवा, मार्च में दाम, अगस्त में दाम

आइवरमेक्टिन, 60000, 51500

पैरासिटामोल, 840, 675

विटामिन सी दवा, 600, 495

लेवासिट्राजिन, 8000, 7300

इन दवाओं के एपीआइ के दाम में हुई वृद्धि (रुपये प्रतिकिलो)

दवा, मार्च में दाम, अगस्त में दाम

एमोक्सोलीन, 1970, 2150

एजिथ्रोमाइसिन, 11950, 13100

ओरनिडाजोल, 1280, 1360

सिप्रोहेप्टाडिन, 5500, 6650