नई दिल्ली।  हाल के दिनों में कोरोना की वजह से होने वाली मौतों के आंकड़े में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और देश में रोजाना 3500-4000 लोगों की कोरोना की वजह से जान जा रही है। उत्तर प्रदेश के नोएडा में स्थित एक अस्पताल में जब कोरोना मरीजों की मौत की वजह जानने के लिए विश्लेषण किया गया तो पता चला कि 78 प्रतिशत कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुई है।

नोएडा के सेक्टर 39 में स्थित कोविड-19 अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ रेणु अग्रवाल ने बताया कि नोएडा में कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से हुई मौतों का विश्लेषण किया गया और पाया गया कि ज्यादातर मरीजों को दिल का दौरा पड़ा। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से मरीजों के खून में थक्के बन जाते हैं। इससे ‘हार्ट अटैक’ की आशंका बढ़ जाती है।

डॉक्टरों की एक नई स्टडी में ये बात सामने आई है कि कोरोना की इस दूसरी लहर में संक्रमित होने वाले 45 साल से कम उम्र के ज्यादातर लोगों की मौत हृदय गति के रुकने की वजह से हुई है। इसलिए अब हम आपको ये बताएंगे कि कैसे आप इस खतरे का समय रहते अंदाजा लगा सकते हैं, और किन बातों का ध्यान रख कर कोरोना वायरस को हरा सकते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद सूजन को बढ़ाता है, जिससे दिल की मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं। जब ऐसा होता है कि तो इससे दिल के धड़कने की गति पर असर पड़ता है, और शरीर में खून के थक्के जमने लगते हैं। डॉक्टर इसे Blood Clotting कहते हैं. मतलब ब्लड क्लॉटिंग की वजह से संक्रमित मरीज का दिल क्षमता के अनुसार पंप नहीं कर पाता और फिर उसके ह्रदय की गति रुक जाती है। अभी ऐसा ही हो रहा है।

किसी इंसान का हार्ट तब फेल होता है, जब उसके दिल की मांसपेशियां खून को उतनी कुशलता के साथ पंप नहीं कर पाती, जितनी की उसे जरूरत है। इस स्थिति में संकुचित हो चुकी धमनियां और हाई ब्लड प्रेशर दिल को पर्याप्त पम्पिंग के लिए कमजोर बना देते हैं।  ये एक क्रॉनिकल समस्या है, जिसका समय पर इलाज न होने से मरीज की हालत बिगड़ जाती है और वो मर जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज को अगर समय रहते उपचार मिल जाए तो वो इस खतरे से बच सकता है। इसके लिए आपको क्या करना है, वो आपको बताते हैं।

अब तक संक्रमण के दौरान शरीर का ऑक्सीजन लेवल चेक करने की सलाह ही दी जा रही थी, लेकिन अब आपको अपने हार्ट रेट पर भी ध्यान रखना है। इसे आप पल्स ऑक्सीमीटर से ही चेक कर सकते हैं। बस इस दौरान आपको एक बात का ध्यान रखना है कि आपका हार्ट रेट 60 से 100 के बीच हो। यहां 60 से 100 का मतलब है कि आपका दिल एक मिनट में कितनी बार धड़क रहा है।

डॉक्टर का कहना है कि संक्रमण के दौरान हार्ट रेट 70 से 80 के बीच रहे तो घबराने की कोई बात नहीं है, लेकिन अगर ये 100 से ज्यादा रहता है तो आपके लिए ये खतरे की घंटी है, और आपको तुरंत अपने डॉक्टर से बात करनी है।  हालांकि यहां भी आपको ये बात याद रखनी है कि वजन उठाते समय, चलते हुए और भागने पर हमारा हार्ट रेट ज्यादा ही रहता है। इसलिए हार्ट रेट आराम से किसी एक जगह पर बैठ कर चेक करें।