रोहतक: हरित और श्वेत क्रांति के अगुआ हरियाणा-पंजाब में नशे और अवसाद से खाक होती जिंदगी के बढ़ते ग्राफ ने स्वास्थ्य जगत, खासकर मनोवैज्ञानिक चिकित्सकों को नए सिरे से सोचने को विवश कर दिया है। पीजीआईएमएस के आपातकालीन विभाग मे रोजाना करीब पांच केस ऐसे आ रहे है, जिनके पीछे मौत का कारण मानसिक तनाव और कुंठा पाई गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट भी बेहद डरावनी है। विश्व में प्रतिवर्ष करीब आठ लाख लोग मानसिक विकारों से आत्महत्या कर रहे हैं। प्रतिदिन के हिसाब में यह आंकड़ा, तीन हजार लोगों की जिंदगी ले रहा है।
कुछ कायदे, जिन्हें अपनाकर सुहाना हो सकता है जिंदगी का सफर







