सुरेश गुप्ता ने मांगा ऑल इंडिया केमिस्ट एसोसिएशन के खातों का ब्यौरा

रोहतक : पिछले महीने महाराष्ट्र ट्रेड कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन (एमएससीडीए) की बैठक में औषधि निर्माता कंपनियों से मिलने वाले आर्थिक सहयोग को निजी हित में उपयोग करने का मामला जोर-शोर से उठा था, जिसके बाद से देश भर के दवा व्यवसाइयों, संगठन पदाधिकारियों, औषधि निर्माताओं, औषधि प्रशासन एवं सरकार ने दिलचस्पी दिखाई।
खोजबीन के बाद जब कुछ तथ्य हाथ लगे तो अहमदाबाद की राष्ट्रीय बैठक में इस मुद्दे पर हल्ला ज्यादा हुआ। निशाने पर आए पदाधिकारी ने कहा कि सभी सवाल लिखित रूप में उन्हें दिए जाए, उसका पूरा हिसाब देकर एसोसिएशन को संतुष्ट करेंगे। अब राष्ट्रीय महासचिव सुरेश गुप्ता ने ऑल इंडिया ड्रगिस्ट एंड कैमिस्ट एसोसिएशन के पैड पर पत्र क्रमांक  AIOCD/GBD/03/2017 दिनांक 8/3/2017 को लिख कर कहा कि ग त माह अर्थात 19 फरवरी, 2017 को अहमदाबाद में हुई कार्यकाकरी कमेटी की बैठक में मांग उठी थी कि एआईओसीडी के नाम पर जो भी धनराशि या अन्य किसी भी  स्टेट एसोसिएशन/ट्रस्ट आदी में आई है, उसका ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए। पत्र की कापी गुप्ता ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जगन्नाथ शिंदे,  कोषाध्यक्ष एस वेंकेटपति, पूर्व कोषाध्यक्ष एम अरुल कुमार और विनय श्रॉफ के अलावा  राज्य प्रधान/सचिव एवं कार्यकारी सदस्यों को भेजी है।
सुर्खियों में एआईओसीडी का शेयर मामला 
एआईओसीडी शेयर मामला भी गर्माता जा रहा है। देशभर के दवा विके्रताओं की गाढ़ी कमाई से एआईओसीडी लिमिटेड के शेयर खरीदे। खरीद के टाइम एक-एक शेयर की कीमत कई गुना बढ़ाकर मुनाफे का सौदा बताया गया। शेयर की आगे बिक्री पर लॉक इन टाइम घोषित किया गया। उत्पादों की कीमत अन्य कंपनियों के उत्पादों के मुकाबले कहीं अधिक रखी गई, जिस कारण रिटेलर इन उत्पादों की खरीदी में पहले दिन से ही झिझकने लगे थे कारण पूछने पर उत्पादन महंगा होना बताया जा रहा था जबकि हिमाचल एक्साइज फ्री जोन से उत्पादन महंगा क्यों हो रहा था, कहीं किसी विशेष को लाभ पहुंचाने की मंशा तो कम नही कर रही थी, इस पर किसी ने विचार नहीं किया । सूत्रो  के अनुसार करीब 12.5 करोड़ रुपये के शेयर बिके थे।
निर्देशकों को 2लाख रुपये प्रति माह की पगार दी जा रही थी जो आज भी बदस्तूर जारी है। जब कंपनी घाटे में चल रही हो तो निर्देशकों की संख्या और पगार में कटौती की जानी चाहिए थी। वहीं एआईओसीडी लिमिटेड के उत्पादों की बिक्री न के बराबर हो रही है और कंपनी के खाते में करीब 2 करोड़ से कम रकम बाकी है। देश भर के दवा विके्रताओं के करीब 12.5 करोड़ रूपये अब दवा व्यावसाइयों ने वापिस मांगने शुरू कर दिए हैं।

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