कोलकाता। अवैध सिरिंज रीसाइक्लिंग रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। इस्तेमाल की गई इंजेक्शन सिरिंजे खुले सडक़ किनारे साफ करके रीसाइकिल की जा रही हैं। जबकि इसे बायोमेडिकल कचरे के रूप में नष्ट किया जाना है। तंगरा के मुंशी बाजार में इस मामले का पर्दाफाश हुआ।

मौके पर महिलाएं बिना दस्ताने, मास्क या सुरक्षात्मक उपकरण के इस्तेमाल की गई सिरिंजों के ढेर धोती मिली। पता चला कि ये सिरिंजें, अधिकृत बायोमेडिकल वेस्ट ठेकेदारों के ज़रिए विभिन्न अस्पतालों से भेजी गई थीं। इनकी खुलेआम छंटाई और सफाई की जा रही थी। संक्रमण, एचआईवी, हेपेटाइटिस, सेप्सिस और अन्य घातक वायरस और बैक्टीरिया के खतरे के बारे में इन मज़दूरों ने कोई चिंता नहीं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अस्पतालों से निकलने वाले सभी बायोमेडिकल कचरे को एक निर्दिष्ट एजेंसी द्वारा एकत्रित किया जाना चाहिए। सुरक्षित रूप से जलाकर या दफनाकर उसका निपटान करना चाहिए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम जाँच करेंगे ऐसा कचरा बाहर कैसे पहुँचा। संग्रहण एजेंसी से जवाब मांगा जाएगा।

तंगरा के मुंशी बाजार में अवैध रीसाइक्लिंग इकाई तो मात्र उदाहरण है। डॉक्टरों का कहना है कि कोलकाता के कई मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में बायोमेडिकल कचरे का लापरवाही से निपटान किया जाता है। यह खुलेआम हो रही एक जानलेवा सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा है।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. तपस प्रमाणिक ने कहा कि बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए अस्पताल कानूनी और नैतिक रूप से जि़म्मेदार हैं।

डॉ. अरिंदम बिस्वास ने कहा कि इसके लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया है। अगर कोई भी बायोमेडिकल कचरा बिना उचित उपचार के अस्पताल परिसर से बाहर ले जाया जाता है, तो यह बायोमेडिकल अपशिष्ट प्रबंधन प्रोटोकॉल का स्पष्ट उल्लंघन है।