लखनऊ। कफ सिरप मामले में पांच फार्मा कम्पनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। एसटीएफ को इनके खिलाफ आरोपियों से साठगांठ के साक्ष्य मिले हंै। इनके खिलाफ एफआईआर की कवायद शुरू कर दी गई है। वहीं एसटीएफ ने इस मामले में लखनऊ और वाराणसी में फरार आरोपियों के परिवारीजनों से पूछताछ की है। इन लोगों से कई दस्तावेज भी मांगे गए है।
एसटीएफ ने बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह, अमित टाटा और विभोर राणा के खिलाफ कई साक्ष्य जुटाए हंै। इनके बैंक खातों से भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। इसी आधार पर एसटीएफ अपनी जांच आगे बढ़ा रही है। इन सभी के गिरोह के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल से लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं। ये लोग लम्बे समय से कोडीन युक्त सिरप की सप्लाई कर रहे थे। इसमें मोटा मुनाफा देखकर ही आरोपियों ने एबॉट कम्पनी के सिरप का उत्पादन बंद किया। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों से बनी फर्मों के जरिए पश्चिम बंगाल तक सिरप की सप्लाई की। फिर यहां से इसे तस्करी कर बांग्लादेश व नेपाल तक भेजा गया।
विभोर राणा की गिरफ्तारी के बाद ही पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ था। जांच में ही सामने आ रहा है कि कई फार्मा कम्पनियों ने भारी मुनाफा कमाने के लिए इस गिरोह का साथ दिया। इनके इशारे पर फार्मा कंपनियों ने मनचाहे तरीके से लेन-देन दिखाया। सिरप की तस्करी में आरोपियों को कई तरह की सुविधाएं भी मुहैया कराईं। इन कम्पनियों के बारे में ईडी भी जांच कर रही है। ईडी इन कम्पनियों के लेन-देन को खंगाल चुकी है। जल्दी ही वह भी इस मामले में आगे की कार्रवाई करेगी।










