कानपुर (उप्र)। अस्पताल में मृत घोषित मरीज पोस्टमॉर्टम के वक्त जिंदा मिलने का मामला सामने आया है। एक जीवित मरीज को गलती से मृत घोषित कर दिया गया। उसके पोस्टमॉर्टम की औपचारिकताएं भी शुरू कर दी गईं। ये सब शहर के लाला लाजपत राय अस्पताल (हैलट अस्पताल) में हुआ। मामला सामने आया तो फिर कार्रवाई भी हुई।

यह है मामला

लाला लाजपत राय अस्पताल (हैलट अस्पताल) का मामला है। पुलिसकर्मी मरीज के शव को मॉर्चरी में शिफ्ट करने के लिए मेडिसिन वार्ड पहुंचे थे। वहां मरीज जिंदा और होश में मिला। दरअसल, अस्पताल के मेडिसिन वार्ड नंबर 12 में दो मरीजों को पास-पास बेड पर भर्ती किया गया था। बेड नंबर 42 पर विनोद और बेड नंबर 43 पर एक अज्ञात बुजुर्ग भर्ती थे। इलाज के दौरान बुजुर्ग मरीज की मृत्यु हो गई। लेकिन जूनियर डॉक्टर ने विनोद की मेडिकल फाइल में उसे ही मृत घोषित कर दिया।

इसके बाद स्वरूप नगर पुलिस स्टेशन को पोस्टमॉर्टम के लिए सूचना भेज दी गई। जब पुलिस शव को शिफ्ट करने के लिए आई, तो वो हैरान रह गए। विनोद जिंदा था! इस खुलासे से अस्पताल में हडक़ंप मच गया। थाने से प्रभारी अधीक्षक राकेश सिंह और मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल संजय काला वार्ड पहुंचे। जब पूछताछ की गई तो गलती करने वाले जूनियर डॉक्टर ने अपनी भूल स्वीकार। अधिकारियों ने तीन कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। इसमें एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर और एक नर्स शामिल है।