भरतपुर (राजस्थान)। 35 हजार मेडिकल स्टोर बंद होने के कगार पर आ गए हैं। इस संबंध में राजस्थान फार्मासिस्ट संघ ने रोष जताया है। सूबे में मेडिकल स्टोरों के संचालन और लाइसेंस नवीनीकरण के लिए कॉमर्शियल नक्शा अनिवार्य किया है। इस नए प्रावधान ने फार्मासिस्टों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेशभर में विरोध के स्वर तेज होते जा रहे हैं। फार्मासिस्ट संघ का दावा है कि यदि यह नियम लागू रहा तो राज्य की 80 प्रतिशत दवा दुकानें प्रभावित होंगी। वहीं, करीब 35 हजार मेडिकल स्टोर बंद हो सकते हैं।
संघ के अनुसार प्रदेश में वर्तमान में लगभग 46,700 मेडिकल स्टोर संचालित हैं। इनमें बड़ी संख्या कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित है। नए प्रावधान के चलते इन दुकानों का लाइसेंस नवीनीकरण कराना लगभग असंभव हो जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष नवीन तिवारी ने बताया कि अब तक मेडिकल स्टोर के लिए नोटरी पब्लिक एडवोकेट से प्रमाणित किरायानामा ही मान्य था।
अब कॉमर्शियल नक्शा अनिवार्य करने से फार्मासिस्टों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण इलाकों में कॉमर्शियल भवनों की उपलब्धता न के बराबर है। ऐसे में यह नियम व्यवहारिक नहीं है। यदि नियम वापस नहीं लिया गया, तो दवा आपूर्ति व्यवस्था चरमरा सकती है।
आमजन को दवाइयों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ेगा। हजारों फार्मासिस्ट बेरोजगारी की मार झेलने को मजबूर होंगे। हर माह प्रदेश में करीब एक हजार मेडिकल स्टोरों का लाइसेंस नवीनीकरण होता है। यह नए नियम के चलते अटक जाएगा। इससे कारोबार प्रभावित होगा। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।










