हल्द्वानी। अस्पताल में बच्चा बदलने की गलत सूचना से हंगामा मचने का मामला प्रकाश में आया है। सुशीला तिवारी अस्पताल में एक आशा वर्कर ने गलत सूचना दे दी। इससे प्रसूता के तीमारदारों ने बच्चा बदलने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। उनका कहना है कि प्रसूता ने लडक़े को जन्म दिया, लेकिन उन्हें लडक़ी दी गई। उन्होंने बच्चे का डीएनए टेस्ट कराने की मांग की है। मामले की सूचना पर चिकित्सकों ने बात कर मामले को शांत कराया।
यह है मामला
रुद्रपुर के रम्पुरा निवासी सर्वेश कुमार की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया। देर रात महिला को बेड पर ही नार्मल डिलीवरी हुई। महिला के जेठ योगेश कुमार ने बताया कि आशा ने उन्हें लडक़ा होने की जानकारी दी। बताया कि अस्पताल में तैनात महिला सफाई कर्मचारी ने उसकी पत्नी को बच्चे के कपड़े लेने भेजा। जब वह वापस आई तो वहां लडक़े के बदले लडक़ी रख दी गई थी। डॉ. महिमा मौर्या ने बताया कि लडक़ा पैदा होने पर उसे ब्लू और लडक़ी के गुलाब टैग लगाया जाता है।
इससे पहचान में आसानी होती है। आशा की ओर से गलत जानकारी दी गई। मुख्य चिकित्सालय अधीक्षक डॉ. अरुण जोशी ने कहा कि सात डिलीवरी में से केवल एक लकड़ा पैदा हुआ। परिजनों की ओर से हंगामा करने पर बात की गई। साथ ही जिस परिवार में लडक़ा पैदा हुआ था, उसकी ओर से बनाया गया वीडियो भी दिखाया गया। उन्होंने बताया कि आशा की ओर से उन्हें गलत जानकारी दी गई थी। प्रसूता के परिजनों से बात की गई। उनकी ओर से कोई लिखित या मौखिक शिकायत नहीं गई है। भ्रामक सूचना फैलाई जा रही है। ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।










