नई दिल्ली। दवा कंपनी और कर्मचारी दवा की अवैध तस्करी में दोषी पाए गए हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने यह जानकारी दी। एनसीबी ने गुजरात के पिपावाव बंदरगाह के रास्ते हरियाणा की कंपनी द्वारा दवाओं की अवैध तस्करी पकड़ी। इस मामले में तीन व्यक्तियों और एक कॉर्पोरेट इकाई को दोषी ठहराया गया। उन्हें जुर्माना लगाया गया और कारावास की सजा सुनाई गई।

फार्मास्युटिकल प्रीकर्सर की तस्करी

अवैध दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले फार्मास्युटिकल प्रीकर्सर की तस्करी की गई थी। हरियाणा के सोनीपत स्थित मेसर्स एल्प्स लाइफ साइंसेज और उसके वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े एक बड़े मामले में दोषी ठहराया गया है। इस मामले की जांच एनसीबी की अहमदाबाद जोनल यूनिट ने की थी।

एनसीबी ने मार्च 2023 में गुजरात के पिपावाव बंदरगाह पर एक कंटेनर को जब्त किया। यह अफ्रीका को निर्यात किया जाना था। सोनीपत के आईसीडी पांची से आ रही इस खेप में लगभग 60 लाख दवा कैप्सूल थे। इनमें एपेड्रिन/स्यूडोएपेड्रिन होने की सूचना दी गई थी। जांच में पता चला कि खेप में तीन उत्पाद शामिल थे। दो उत्पादों को प्रतिबंधित पदार्थ युक्त बताकर गलत तरीके से विनियोजित किया गया था। स्यूडोएफ़ेड्रिन, मेथम्फेटामाइन के अवैध निर्माण में इस्तेमाल होने वाला एक महत्वपूर्ण घटक है। मेथम्फेटामाइन एक मनोविकारक पदार्थ है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।

जांच में उत्पादन और निर्यात रिकॉर्ड में जानबूझकर हेराफेरी मिली। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रिय संलिप्तता का भी पता चला है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में प्रबंध निदेशक सुमित कुमार, स्टोर प्रभारी सुमित और सह-उत्पादन प्रबंधक धनेश चमोली शामिल हैं। कंपनी, मेसर्स एल्प्स लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपी बनाया गया है।