नई दिल्ली। जीवनरक्षक दवाइयां जल्द ही सस्ती मिल सकेंगी। बीते दिवस हुई भारत-ईयू ट्रेड डील के चलते इसकी संभावना जताई गई है। इस डील से वजन घटाने और जान बचाने वाली कुछ दवाएं भी शामिल हैं। उन पर इपोर्ट ड्यूटी कम हो सकती है। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि कीमतें पेटेंट, रेगूलेशन और सप्लाई चेन पर निर्भर करेंगी।

भारत-ईयू ट्रेड रिलेशन में फार्मॉस्यूटिकल्स का एक खास स्थान है। भारत जेनेरिक दवाओं और वैक्सीन में ग्लोबल लीडर है। वहीं, ईयू कई मल्टीनेशनल दवा बनाने वाली कंपनियों का घर है। वहां हाई-वैल्यू, इनोवेटिव थेरेपी बनती हंै। अब भारत में ईयू से होने वाले ज्यादातर एक्सपोट पर लगने वाले टैरिफ को धीरे-धीरे खत्म किए जाने की उम्मीद है।

भारत-ईयू पार्टनरशिप ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी में गहरी हुई है। यह लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को दिखाता है। यह सहयोग फार्मास्यूटिकल्स जैसे हाई-वैल्यू सेक्टर में आसान ट्रेड के लिए मंच तैयार करता है। इससे दोनों पक्षों को कम बाधाओं और मजबूत रेगुलेटरी तालमेल से फायदा होगा।

एफटीए ईयू एक्सपोर्ट पर 4 बिलियन यूरो तक के टैरिफ खत्म कर देगा। इसमें फार्मास्युटिकल उत्पाद भी शामिल हैं। इससे इंपोर्टेड दवाओं, मेडिकल डिवाइस और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी कम हो सकती है। इंपोर्टेड दवाओं के लिए, जिसमें यूरोप में बनी कुछ हाई-एंड कैंसर थेरेपी, बायोलॉजिक्स और वजन घटाने वाली दवाएं शामिल हैं। कम टैरिफ से लैंडेड कॉस्ट यानी कस्टम ड्यूटी और फ्रेट के बाद की कीमत कम हो सकती है। इससे डिस्ट्रीब्यूटर और अस्पतालों के लिए ऐसी दवाएं खरीदना सस्ता हो जाएगा।