नई दिल्ली। हार्ट अटैक के बाद अब उम्र भर बीटा-ब्लॉकर्स की जरूरत नहीं पड़ेगी। दक्षिण कोरिया में हुए एक क्लीनिकल ट्रायल में यह बात सामने आई है। हार्ट अटैक से उबर चुके मरीजों को जीवन भर बीटा-ब्लॉकर्स दवाएं लेने की जरूरत नहीं है। ऐसे मरीज एक वर्ष के बाद इन दवाओं का सेवन बंद कर सकते हैं।

यह कहता है अध्ययन

न्यू ऑरलियंस में अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के विज्ञानियों की बैठक में इस रिसर्च के नतीजे पेश किए गए। इसे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में भी प्रकाशित किया गया है।

शोधकर्ताओं ने इस ट्रायल में कुल 2,540 मरीजों को शामिल किया। ये मरीज पहले हार्ट अटैक का शिकार हो चुके थे। इन्हें इलाज के तौर पर मेटोप्रोलोल और एटेनोलोल जैसी बीटा-ब्लॉकर्स दवाएं दी जा रही थीं।

पाया गया कि 12 महीने के बाद बीटा-ब्लॉकर्स दवाएं बंद करने वाले मरीजों की स्थिति सामान्य थी। वे मरीज जिन्होंने दवाओं का सेवन आगे भी जारी रखा था। औसतन 3.5 वर्षों तक इन मरीजों के स्वास्थ्य पर नजर रखी गई। दवा बंद करने वाले केवल 7.2 प्रतिशत मरीजों में दिल से जुड़ी गंभीर घटनाएं घटीं। वहीं, दवा जारी रखने वाले 9 प्रतिशत मरीजों को ऐसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा।

बीटा-ब्लॉकर्स दवाएं हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर को कम करने का काम करती हैं। हार्ट अटैक के बाद दिल को सुरक्षित रखने और हृदय संबंधी समस्याओं को रोकती हैं। लंबे समय से इन दवाओं को उपचार का सबसे प्रमुख आधार माना जाता रहा है।